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अब्दुल रहमान की रिहाई की संभावना बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले एक अफ़ग़ान नागरिक को उसके ख़िलाफ़ चल रहे मामले की समीक्षा के बाद रिहा कर दिए जाने की संभावना है. इससे पहले आशंका जताई जा रही थी धर्मांतरण के बाद 16 साल पहले ईसाई बने अब्दुल रहमान ने ईसाई धर्म नहीं छोड़ा तो शरिया क़ानूनों के तहत उन्हें मौत की सज़ा हो सकती है. एक वरिष्ठ अफ़ग़ान अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि पक्के सबूतों के अभाव में अब रहमान का मामला दोबारा महान्यायवादी को सौंप दिया गया है. अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि महान्यायवादी द्वारा मामले की समीक्षा के दौरान रहमान को हिरासत में रखे जाने की कोई ज़रूरत नहीं है. इसके पहले राष्ट्रपति हामिद करज़ई के एक प्रवक्ता ने कहा था कि अब्दुल रहमान को जल्द रिहा किया जा सकता है. काबुल से बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार अब्दुल रहमान मामले को लेकर अफ़ग़ानिस्तान सरकार भारी दबाव में है. माना जाता है कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई की सरकार को सहयोग देने वाले देशों ने उन पर रहमान को रिहा किए जाने का दबाव बढ़ा दिया है. करज़ई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए पिछले दो दिनों के दौरान कई उच्चस्तरीय बैठकों में इस पर विचार किया है. अब जबकि रहमान की रिहाई की संभावना बढ़ गई है, सरकार इस बारे में ज़्यादा कुछ बताना नहीं चाहती क्योंकि काबुल में इस्लामी कट्टरपंथी रहमान को कड़ी सज़ा दिए जाने के पक्ष में हैं. मानसिक स्थिति पर सवाल इससे पहले रहमान के परिजनों ने अदालत से मामले को खारिज़ किए जाने की अपील करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है. बीबीसी से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के जज अंसारुल्ला मावलाविज़ादा ने भी रहमान के स्वास्थ्य को लेकर ऐसा ही संदेह व्यक्त किया है. जज का ये भी कहना था कि रहमान के अफ़ग़ान नागरिक होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. अब्दुल रहमान एक ईसाई सहायता एजेंसी में काम करते हुए मुसलमान से ईसाई बन गए थे. ईसाई सहायता एजेंसी में काम करने के सिलसिल में रहमान 16 वर्षों तक अफ़ग़ानिस्तान से बाहर रहे. माना जाता है कि इसी दौरान जर्मनी में उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया. | इससे जुड़ी ख़बरें पोप ने भी करज़ई से गुहार लगाई25 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस धर्मांतरित शख्स पर अफ़ग़ानिस्तान में बैठक25 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस धर्मांतरण के कारण 'मौत के मुँह में'22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'धर्मांतरित अफ़ग़ान की रिहाई संभव'24 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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