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बम धमाकों के बाद राजनीति तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वाराणसी में दो बम धमाकों के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गईं हैं. इन धमाकों में 15 लोग मारे गए और 100 से ज़्यादा अन्य घायल हो गए हैं. विश्व हिंदू परिषद और भाजपा ने बुधवार को प्रदेश बंद का आयोजन किया है. केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी मंगलवार को ही वाराणसी पहुँच गईं. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में घायलों से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं ने संकटमोचन मंदिर के घटनास्थल का भी दौरा किया. सोनिया गांधी ने घोषणा की कि केंद्र और प्रदेश सरकार बम धमाकों के ज़िम्मेदार लोगों नहीं बख्शेगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने सभी राजनीतिक दलों से इस घटना से राजनीति लाभ न उठाने की अपील की है. उनका कहना था कि ये धमाके शांति और सदभाव बिगाड़ने के लिए किए गए हैं. सरकार पर आरोप लेकिन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि जब भी समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है, सांप्रदायिक दंगे होते हैं. उन्होंने इस घटना की निंदा की और मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाने का अनुरोध किया. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने वाराणसी बम धमाकों की निंदा की है. साथ ही प्रदेश सरकार की मदद करने का अनुरोध किया है. उनका कहना था कि केंद्र में भाजपा की हार का मतलब यह नहीं है कि सांप्रदायिक एजेंडे की हार हो गई है. सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को इनसे मुक़ाबले के लिए तैयार रहना चाहिए. विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियों की वजह से चरमपंथ को बढ़ावा मिला है. उनका कहना था कि यदि राजनीतिक दल तुष्टीकरण की नीति जारी रखेंगे तो इसके परिणाम गंभीर होंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें बम धमाकों के बाद हाई अलर्ट, शांति की अपील 08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस वाराणसी बम धमाकों में 15 की मौत07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस धमाकों से दहला वाराणसीभारत और पड़ोस पहले भी मंदिरों पर हुए हैं हमले07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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