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रायपुर से शुरू हुई 'राधा' की रासलीला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महिलाओं की वेशभूषा पहन कर कृष्ण भक्ति में रमे उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक देवेंद्र कुमार पंडा पूरे देश में भक्ति की अलख जगाने निकल पड़े हैं. देश भर में दौरा करके वे कृष्ण की राधा भक्ति के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं, इसकी शुरुआत उन्होंने रायपुर से की है. कभी अपने को दूसरी राधा, कभी प्रिया और कभी बाबा कृष्णानंद कहने वाले देवेंद्र कुमार पंडा जब रायपुर पहुँचे तो लोग गहनों से लदे-फदे इस भूतपूर्व पुलिस अधिकारी को देखने के लिए उमड़ पड़े. पंडा यहां “कृष्णा आनंद महोत्सव” में शामिल होने के लिए आए, जिसका आयोजन उनके एक भक्त ने किया. कभी कड़क आईपीएस अफ़सर के रुप में मशहूर पंडा का कहना है कि राधा बनने के बाद से उनके अंदर की कठोरता खत्म हो गयी और अब तो उनके शरीर में भी स्त्रियोचित परिवर्तन आने लगा है. पंडा अपने को पुरूष रुप में बुलाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहते हैं- “मेरे स्वामी श्रीकृष्ण मुझे पिता के रुप में मिले थे, फिर मेरे साथी बने और अब वे मेरे पति हैं. मैं चाहती हूँ कि मुझे उनकी पत्नी के रुप में ही जाना जाए.” पेंशन अपनी पत्नी वीणा से गुज़ारा भत्ते के मामले पर विवाद होने के बाद स्त्री वेश में अदालत पहुँचकर सबको चौंकाने वाले पंडा का कहना है कि वे संसारिकता से ऊपर उठ चुके हैं और सारे रिश्ते-नातों का उन्होंने त्याग कर दिया है. आंखें बंद किए पंडा बताते हैं- “इस संसार के सभी प्राणी मेरे लिए बराबर हैं. मैं एक साल तक सती भाव में रही, उसके बाद मैं पत्नी भाव में रहने लगी. तभी से मैंने दुपट्टा ओढ़ना शुरु किया. इस दुपट्टे को ओढ़ते ही मैं सारे बंधनों से मुक्त हो गई.” ये और बात है कि आईजी के रुप में अपनी सेवाओं के बदले हर माह मिलने वाली पेंशन को लेकर पंडा ख़ासे सतर्क दिखते हैं. हालांकि अभी पंडा की पेंशन शुरु नहीं हुई है लेकिन पंडा चाहते हैं कि उनकी पेंशन की प्रक्रिया जल्दी निपटे. पंडा कहते हैं- “पेंशन मैं किसी और को क्यों दूँगी? पेंशन दूसरे को दूँगी तो मैं क्या हवा खाकर रहूँगी?” आलोचना हालाँकि पंडा के खिलाफ़ हाल ही में उत्तर प्रदेश के नौएडा समेत कुछ और शहरों में अपनी ज़मीन और मकान को बेचने के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप भी लगे हैं लेकिन पंडा बार-बार कहते हैं कि वे संसारिकता से मुक्त हो चुके हैं. राधा बनकर ढोंग रचने के सवाल पर पंडा कहते हैं- “मैं आलोचकों का स्वागत करती हूँ. आलोचना तो भगवान की भी हुई है, मैं इससे क्या घबराउँगी! मैं संसारिकता से ऊपर हूँ, इसलिए मैं इन्हें क्षमा करती हूँ.” ज़ाहिर है, आईजी से राधा बने देवेंद्र पंडा संसारिकता से ऊपर उठने का दावा ज़रुर करते हैं, लेकिन पंडा चाहते हैं कि उन्हें संसार के सभी सुख भी मिलें. फ़िलहाल पंडा का सारा ध्यान देश भर में होने वाले उनके “कृष्णा आनंद महोत्सव” पर है जिसके लिए उनके भक्त दिन-रात एक किए हुए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें वीर रस से श्रृंगार रस की ओर15 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वर्दी नहीं घुँघरू ही चाहिए पांडा को16 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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