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सोमवार, 31 अक्तूबर, 2005 को 09:19 GMT तक के समाचार
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'धमाकों से जुड़ी जानकारी मिली है'
दिल्ली
कुछ लोगों को अपने परिजनों का पता तक नहीं चल रहा
दिल्ली में शनिवार को हुए धमाकों के बाद भारत में अधिकतम सुरक्षा सतर्कता बरती जा रही है और केंद्रीय मंत्रिमंडल की आपात बैठक हुई है.

ताज़ा ख़बरों के मुताबिक धमाकों में मरने वालों की संख्या 62 हो गई है और 214 लोग घायल हैं.

दिल्ली में गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि धमाके के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी मिली है लेकिन इस समय इसकी विस्तृत जानकारी देना जल्दबाज़ी होगी.

उन्होंने उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने के इनकार कर दिया जिनमें 'इस्लामी इन्क़लाबी महाज़' नाम के तथाकथित कश्मीरी चरमपंथी संगठन के धमाकों के लिए ज़िम्मेदार होने की बात कही गई थी.

बीबीसी के दिल्ली कार्यालय को भी फ़ोन कर, ख़ुद को इस गुट से संबंधित बताने वाले एक व्यक्ति ने, हमले की ज़िम्मेदारी लेने की बात कही.

भारत में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कश्मीर में चरमपंथी गतिविधियों के जानकारों का कहना है कि इस संगठन के बारे में कभी पहले नहीं सुना गया.

उधर बम धमाके के दो दिन बाद भी लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में राजधानी के अस्पतालों की ख़ाक छान रहे हैं

एक ही गुट?

इससे पहले दिल्ली पुलिस का कहना था कि यह संभव है कि तीनों धमाकों के पीछे एक ही गुट हो.

दो दिन के बाद भी लोग अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं

पुलिस इस संगठन के दावे की जाँच कर रही है.

दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त करनैल सिंह ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, "धमाके के समय को देखते हुए यही लगता है कि सभी तीनों धमाकों के पीछे एक ही गुट है."

उन्होंने बताया, "इन्क़लाबी गुट का गठन 1996 में हुआ था. यह गुट बहुत ज़्यादा सक्रिय नहीं रहा है. लेकिन इसके तार लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं."

इस मामले में कई लोगों से पूछताछ हुई है लेकिन अभी तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

परिजनों की तलाश

बम धमाके के दो दिन बाद भी कई लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं.

कई शव तो इतनी बुरी तरह जले हुए हैं कि उन्हें पहचान पाना मुश्किल हो गया है और डीएनए टेस्ट के बिना ये संभव भी नहीं लगता.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ए रामदॉस ने बताया कि धमाकों के बाद 214 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिनमें से 56 लोगों की मौत हो चुकी थी जबकि छह लोगों ने बाद में दम तोड़ दिया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल का दौरा किया.

खचाखच भरे बाज़ार में धमाके के कारण बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए

दो धमाके तो अति व्यस्त बाज़ार पहाड़गंज और सरोजनी नगर में हुए.

उस समय दीपावली और ईद की तैयारी के सिलसिले में लोगों की भारी भीड़ थी.

तीसरा धमाका एक बस में हुआ था. लेकिन पुलिस के मुताबिक़ तीसरे धमाके में किसी की मौत नहीं हुई.

दिल्ली पुलिस ने धमाकों की जाँच के सिलसिले में दिल्ली के गेस्ट हाउस और होटलों पर छापे मारे.

एक स्वर में निंदा

दिल्ली धमाकों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा हुई है.

अमरीकी विदेशमंत्री कौंडोलीसा राइस ने कहा है कि इस दुखद घटना ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि आतंकवाद सीमाएँ नहीं देखता.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अन्नान ने दुख व्यक्त किया

चीन के राष्ट्रपति हू जिनताओ ने कहा कि दुनिया को और सुरक्षित बनाने के लिये चीन, भारत सहित पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिल कर काम करने को तैयार है.

ब्रिटेन ने कहा है कि इन धमाकों ने फिर दिखा दिया है कि चरमपंथियों को मानव जीवन की कोई परवाह नहीं है.

पाकिस्तान ने इन हमलों को बर्बरतापूर्ण कार्रवाई कहा है. फ़्रांस ने कहा है कि इस तरह की गतिविधियाँ को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी हमले पर दुख व्यक्त किया है.

66'सहायता में कमी नहीं'
प्रधानमंत्री ने कहा है कि घायलों के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.
66धमाके सुर्खियों में
दिल्ली बम धमाकों की ज़ोरदार रिपोर्टिंग की है दिल्ली के अख़बारों ने-
66ताज़ा वीडियो रिपोर्ट
धमाकों के एक दिन बाद दिल्ली की स्थिति पर वीडियो रिपोर्ट-
66मैंने देखे जले हुए शव..
दिल्ली के सरोजनी नगर बाज़ार में धमाके के बाद अफ़रा-तफ़री का माहौल था.
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