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केंद्र सरकार का पत्र सौंपने से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में केंद्र सरकार ने गुजरात दंगों की जाँच कर रहे आयोग को वो चिट्ठियाँ सौंपने से इनकार कर दिया है जो तत्कालिन राष्ट्रपति के आर नारायणन ने तत्कालिन प्रधानमंत्री वाजपेयी को लिखी थीं. भारत सरकार ने इस मामले में विशेषाधिकार की दलील देते हुए कहा है कि चिट्ठियाँ उजागर करना सार्वजनिक हित में नहीं है. जस्टिस नानावती की अध्यक्षता वाले दो सदस्यीय आयोग के समक्ष एक हलफ़नामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने फ़ैसला लिया है कि वो किसी को भी ये दस्तावेज़ पेश करने की इजाज़त नहीं देगी. ये हलफ़नामा उपसचिव पद के एक अधिकारी ने दायर किया है. हलफ़नामा में लिखा गया है कि केंद्र सरकार का मत है कि ये सरकार से जुड़े अप्रकाशित आधिकारिक दस्तावेज़ हैं. दंगा प्रभावितों के वकील मुकुल सिंहा ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर हैरानी जताई है. उन्होंने कहा, " यूपीए सरकार विशेषाधिकार के तहत ऐसी जानकारी कैसे छिपा सकती है जो सच तक पहुँचने में मदद कर सकती है." माना जाता है कि पूर्व राष्ट्रपति नारायणन ने गुजरात में सेना के इस्तेमाल को लेकर 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को चिट्ठियाँ लिखी थीं. |
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