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अमरमणि-मधुमणि ने समर्पण किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि ने गुरूवार को लखनऊ की एक ज़िला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों की ज़मानत रद्द कर दी थी और उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. दोनों पर कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या का षडयंत्र रचने का आरोप है. अमरमणि त्रिपाठी इस आरोप को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताते हैं. दोनों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिली थी. लेकिन केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई ने ज़मानत के ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी. सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति ए कबीर ने अमरमणि और मधुमणि की ज़मानत रद्द करते हुए दोनों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. मामला उल्लेखनीय है कि मधुमिता शुक्ला की मई 2003 में उनके घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे उस समय गर्भवती थीं. उस वक़्त अमरमणि त्रिपाठी मायावती सरकार में मंत्री थे. सीबीआई का आरोप है कि मधुमिता शुक्ला अमरमणि त्रिपाठी के बच्चे की माँ बनने वाली थीं. जाँच एजेंसी का कहना है कि अमरमणि त्रिपाठी को लग रहा था कि इससे उनकी बदनामी हो सकती है. मधुमिता शुक्ला की हत्या के बाद काफ़ी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और इसके बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. सीबीआई ने नवंबर 2003 में मधुमिता के हत्यारे को पकड़ने का दावा किया था. सीबीआई ने अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को भी गिरफ़्तार कर लिया था. अमरमणि त्रिपाठी बाद में बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे और उनका कहना है कि वे मधुमिता शुक्ला से सिर्फ़ दो बार मिले थे. वे इन आरोपों को ग़लत बताते हैं कि उनके मधुमिता शुक्ला से कोई संबंध थे. |
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