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रविवार, 18 सितंबर, 2005 को 22:55 GMT तक के समाचार
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हड़प्पा सभ्यता पर नया प्रकाश

खनन स्थल
उत्खनन में पाँच फुट चार इंच लंबे तीन नर कंकाल मिले हैं जिनके हाथों में तांबे के कड़े हैं
उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के एक गाँव में पिछले दिनों सिंधु कालीन सभ्यता के कुछ अवशेष और कंकाल मिले हैं.

पुरातत्वविदों के अनुसार इनसे पहली बार ये प्रमाणित होता है कि ताम्र और सिंधु काल साथ थे, आगे-पीछे नहीं.

अभी तक पुरातत्वविद् मानते थे कि ताम्र युग 3000 वर्ष पुरानी हड़प्पा सभ्यता के बाद आया था.

पुरातत्ववेत्ताओं ने इस ख़ोज को एक अति महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है और कहा है कि यह खोज इतिहास को एक नया मोड़ देगी.

सनौली उत्खनन परियोजना के निदेशक डॉक्टर धर्मवीर शर्मा कहते हैं,"हाल में हुए उत्खनन से यह बात आईने की तरह साफ़ हो गई है कि ताम्र और हड़प्पा सभ्यता एक ही थीं."

उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री कोकब हमीद ने बताया कि अभी इस स्थान पर कई और महीने उत्खनन का काम चलेगा.

खुदाई

 हाल में हुए उत्खनन से यह बात आईने की तरह साफ़ हो गई है कि ताम्र और हड़प्पा सभ्यता एक ही थीं
डॉक्टर धर्मवीर शर्मा, पुरातत्वविद्

सिंधुघाटी सभ्यता के अवशेष दिल्ली से 75 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत के सनौली गाँव में हुई खुदाई में मिले.

उत्खनन में तीन नर कंकाल मिले हैं जिनकी लंबाई पाँच फुट चार इंच है और उनके हाथों में तांबे के कड़े हैं.

इनके अलावा वहाँ लगभग 20 मिट्टी के बरतन मिले हैं.

डॉक्टर धर्मवीर शर्मा बताते हैं कि यहाँ पिछले कई वर्षों से खुदाई हो रही थी और उनमें लगातार ऐसे अवशेष मिलते रहे हैं.

खनन में मिले मिट्टी के बरतन
खनन में मिले मिट्टी के बरतन

वे कहते हैं,"ये अवशेष इस बात की पुष्टि करते हैं कि हड़प्पा सभ्यता के लोग पश्चिमी उत्तरप्रदेश में उस जगह रहना पसंद करते थे जहाँ कि यमुना, हिंडल और काली नदियाँ बहती थीं."

डॉक्टर शर्मा ने बताया कि पुरातत्ववेत्ताओं के लिए कंकाल मिलना एक बड़ी बात है.

वे कहते हैं,"पिछले नौ दशक से हमें अपने जिन सवालों का उत्तर नहीं मिल पा रहा था वह हमें इन कंकालों से मिल गया है."

उम्मीद

उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री कोकब हमीद ने इस ख़ोज की जानकारी देते हुए कहा कि उनका विभाग इस क्षेत्र में महाभारत सर्किट पर काम कर रहा था जो 1650 ईसापूर्व का युग है.

 क़िस्मत देखिए कि हम तीन हज़ार वर्ष पुरानी सभ्यता से टकरा गए और एक ही क्षण में इतिहास ही बदल गया
कोकब हमीद, पर्यटन मंत्री, उत्तर प्रदेश

उन्होंने कहा,"क़िस्मत देखिए कि हम तीन हज़ार वर्ष पुरानी सभ्यता से टकरा गए और एक ही क्षण में इतिहास ही बदल गया."

कोकब हमीद का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद भारत में कोई भी इतनी पुरानी सभ्यता नहीं रह गई थी.

हड़प्पा, तक्षशिला और मोहनजोदड़ो जैसी प्राचीन सभ्यताओं की स्मृतियाँ सब पाकिस्तान के हिस्से में चली गईं.

ये बताते हुए कि अभी उत्खनन का कार्य जारी रहेगा मंत्री ने कहा,"अभी तो केवल धागे का एक सिरा ही मिला है, पुरातत्वत्ताओं के अनुसार यहाँ और महत्वपूर्ण धरोहर मिलने की संभावना है."

पर्यटन मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस खोज से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.

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