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मुस्लिम मंत्री के मठ में 'प्रवेश' से तनाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में एक मुस्लिम मंत्री के एक मठ में कथित प्रवेश करने का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर मंगलवार को पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा है जिससे 15 लोग घायल हो गए. असम के बारपेटा शहर में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. प्रदर्शनकारी इस अफ़वाह से उत्तेजित थे कि एक मुस्लिम राजनेता ने एक हिंदू मठ में प्रवेश किया था. प्रशासन ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ते देख कर बारपेटा में अतिरिक्त सुरक्षाबलों को भेजा है. स्थानीय अख़बारों में ख़बर छपी थी कि असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई सोमवार को अपने दो साथियों हिमंत बिस्वा सरमा और राकिबुल हुसैन के साथ बारपेटा स्थित सातरा मठ गए थे. ऐसा कहा जा रहा है कि राकिबुल हुसैन मठ में बिना स्थानीय पुजारी की अनुमति के प्रवेश कर गए थे. पुजारी का कहना है कि मुसलमानों और महिलाओं को मठ में प्रवेश की अनुमति नहीं है. लेकिन राकिबुल हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वो मठ में नहीं गए थे और स्थानीय मीडिया में छपी ख़बरें आधारहीन हैं. लेकिन भाजपा और कुछ स्थानीय ग्रुपों ने इस घटना के विरोध में मंगलवार को एकदिन के लिए बारपेटा बंद का आह्वान किया था. इस दौरान मठ के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और जब यह भीड़ हिंसक हो उठी तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. अधिकारियों का कहना है कि पुलिस के लाठीचार्ज से 15 लोग घायल हो गए हैं. |
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