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सूनामी राहत पर उठे सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में प्रशासन ने रिहाइशी इलाक़ो के आसपास मिट्टी की दीवारें बनाने का फ़ैसला लिया है. छह महीने पहले आए सूनामी तूफ़ान में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ज़बरदस्त तबाही हुई थी. तूफ़ान में करीब 4000 लोग मारे गए थे और करीब 50000 लोग विस्थापित हो गए थे. अनाधिकृत सूत्रों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 10000 से क़म नहीं है. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि ये दीवारें समुद्र के आसपास रहने वालों को सुरक्षा प्रदान करेंगी. लेकिन पर्यावरणविद इसे पैसे की बर्बादी मानते हैं. पर्यावरण को ख़तरा सरकार ने दीवार बनाने के लिए बीस करोड़ रूपए आवंटित किए हैं. ऐसे इलाक़े जहाँ समुद्र के लहरों से सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचता है,वहाँ दीवारें बनकर तैयार हैं. अंडमान के मुख्य सचिव डी एस नेगी का कहना है कि ये दीवारें समुद्र किनारे रहने वाले लोगों की माँग पूरी करने के लिए बनाई जा रही हैं. लेकिन पोर्ट ब्लेयर में आधारित सोसाइटी फॉर अंडमान एंड निकोबार इकोलॉजी के संयोजक समीर आचार्य मानते हैं कि इस अभियान का उल्टा असर होगा.
उनके मुताबिक दीवारों के चलते अंडेमान के जंगलों पर असर पड़ेगा क्योंकि इन्हें बनाने के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी खोदी जा रही है. .सीविल इंजीनियर गौतम शोम कहते हैं कि ये दीवारें तूफ़ानों के बोझ तले दब जाँएगी. क़म मुआवज़ा उधर गांववालों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त मुआवज़ा नहीं मिला है.नीकोबार की एक आदिवासी महिला को तो दो रूपए का चैक थमाया गया था . बीबीसी वेबसाईट पर इस ख़बर के प्रकाशित होने के बाद कई पीड़ितों को और मुआवज़ा दिया गया लेकिन नाराज़ लोगों ने पैसे लेने से इंकार कर दिया. प्रशासन का कहना है कि उसने अस्थाई करीब 10000 अस्थाई घरों का निर्माण पूरा कर लिया है लेकिन लोगों में इसे लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि उन्हें स्थाई घर कब तक मिलेंगे. |
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