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सोमवार, 13 जून, 2005 को 12:57 GMT तक के समाचार
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कोक को लाइसेंस देने से इंकार

कोक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
कोक के ख़िलाफ़ प्लाचीमाड़ा में दो साल से आंदोलन चल रहा है
केरल की पेरूमट्टी ग्राम पंचायत ने हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए कोका कोला संयंत्र को लाइसेंस देने से इंकार कर दिया है.

पल्लकाड़ ज़िले में स्थित कोका कोला संयंत्र का दो साल से विरोध हो रहा है.

लेकिन इन आंदोलनकारियों को करारा झटका देते हुए केरल हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में पेरूमट्टी ग्राम पंचायत से कहा कि वो कोका कोला फ़ैक्ट्री को फिर से काम शुरू करने के लिए लाइसेंस दे वरना यह मान लिया जाएगा कि संयंत्र को दो साल का लाइसेंस मिल गया है.

कोका कोला की यह फ़ैक्ट्री प्लाचीमाड़ा में है और पेरूमट्टी पंचायत के तहत आती है.

विरोध कर रहे लोगों का कोका कोला पर आरोप है कि बिना इजाज़त के भूजल के इस्तेमाल और प्रदूषण फैलाने के कारण वहाँ के लोगों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

इस मुहीम से वामपंथी दलों के जुड़ जाने के बाद से इस मुहीम को और भी ताकत मिली.

हालांकि इस कोका कोला प्लांट को इजाज़त देने वाली सरकार भी वामपंथी गठबंधन एलडीएफ़ की ही थी.

अस्थाई लाइसेंस भी रद्द

पिछले कुछ हफ़्तों में केरल हाईकोर्ट ने कोका कोला की ओर नरम रुख़ तब अपनाया, जब उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित एक पर्यावरण समिति ने प्लाचीमाड़ा में कोका कोला का विरोध कर रहे संगठनों को ग़लत ठहराया.

अपने आदेश में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने यह भी कहा है कि अगर पेरूमट्टी ग्राम पंचायत 10 जून तक लाइसेंस जारी नहीं करेगी तो यह मान लिया जाएगा कि कोका कोला को दो साल के लिए लाइसेंस जारी कर दिया गया है.

आदेश में यह भी कहा गया है कि प्लाचीमाड़ा के इस कोका कोला प्लांट में कंपनी को कुछ विशेष हिदायतों को ध्यान में रखना होगा और निर्धारित पानी की मात्रा का इस्तेमाल करना होगा.

इसके बाद पंचायत ने कोका कोला संयंत्र को 13 शर्तों सहित तीन महीने के लिए लाइसेंस जारी कर दिया था.

लेकिन संयंत्र की ओर से इस पर आपत्ति करते हुए कहा गया कि लाइसेंस तो दो साल के लिए मिलना चाहिए. इस आपत्ति के बाद 13 जून को पंचायत ने कोका कोला को दिया गया तीन महीने का लाइसेंस भी रद्द कर दिया.

बीबीसी के दक्षिण भारत संवाददाता सुनील रामन का कहना है कि कुछ ही दिनों बाद पंचायत के चुनाव होने हैं और ऐसे में पंचायत ऐसे कोई संकेत नहीं देना चाहती थी कि वह आंदोलन की अनदेखी करके हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर रही है.

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