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राष्ट्रगान में बदलाव संबंधी याचिका ख़ारिज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रगान से 'सिंध' शब्द हटाने के लिए दायर की गई याचिका को ठुकरा दिया है और याचिकाकर्ता पर 10 हज़ार रूपए का दंड लगाया है. याचिकाकर्ता संजीव भटनागर ने अपनी जनहित याचिका में ये कहा था कि चूँकि 'सिंध' अब पाकिस्तान का हिस्सा है इसलिए उसे भारत के राष्ट्रगान से निकालकर उसकी जगह 'कश्मीर' शब्द जोड़ दिया जाए. लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की अदालत की तीन सदस्यों की पीठ ने ना केवल याचिका ख़ारिज़ की बल्कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ता से जुर्माना भरने के लिए कहा. भारत के मुख्य न्यायाधीश आर सी लाहोटी, न्यायाधीश डी एम धर्माधिकारी और न्यायाधीश जी पी माथुर के तीन सदस्यों के पीठ ने अपने फ़ैसले में कहा कि ये याचिका केवल प्रचार हासिल करने के लिए दायर की गई थी. न्यायाधीश लाहोटी ने फ़ैसले में कहा,"राष्ट्रगान से किसी तरह की छेड़छाड़ महाकवि रवींद्रनाथ टैगोर के अपमान के समान है". उन्होंने कहा,"याचिकाकर्ता पर जुर्मान इसलिए लगाया गया है ताकि ऐसी याचिकाओं को हतोत्साहित किया जाए जिनसे केवल अदालत का समय नष्ट होता है". उल्लेखनीय है कि संजीव भटनागर की ये पिछले वर्ष सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए आई थी. तब अदालत ने उनसे कहा कि उन्होंने बिना केंद्र को नोटिस दिए ये याचिका दायर की इसलिए वह पहले केंद्र के पास जाएँ. केंद्र का जवाब मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने इस वर्ष फिर अदालत में याचिका दायर की. इसके बाद 27 अप्रैल को अदालत ने मामले पर विचार के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा और शुक्रवार 13 मई को फ़ैसला सुनाया. |
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