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सुब्रत रॉय को सामने लाने की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ खंडपीठ में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई है और आरोप लगाया है कि सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को उनकी पत्नी और समूह के कुछ अधिकारियों ने बंधक बना रखा है. यह याचिका बीएन शुक्ला नामक एक अध्यापक ने सोमवार को दाखिल की है और उन्होंने अपने आपको सुब्रत रॉय का शुभचिंतक बताया है. याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा है कि उत्तर प्रदेश और इसके आस-पास कई बार कंपनियाँ निवेशकों के पैसे लेकर चंपत हो चुकी हैं और हज़ारों निवेशकों ने सहारा कंपनी में अपने पैसे लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि ऐसा ना हो कि इस कंपनी में भी लोग निवेशकों का पैसा लेकर विदेश ना भाग जाएँ इसलिए ये याचिका दायर की गई है. अदालत ने बीएन शुक्ला को गुरुवार को एक हलफ़नामा दाख़िल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वो यह बताएँ कि उन्होंने सुब्रत रॉय से कब बात की थी और उन्हें कहाँ बंधक बनाकर रखा गया है. याचिका में उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी एक पक्ष बनाया गया है. सुब्रत रॉय एक अप्रैल के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई पड़े हैं. सहारा समूह की ओर से मंगलवार को एक बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि वे डॉक्टरों की सलाह पर पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य-लाभ कर रहे हैं. वक्तव्य में कहा गया है कि जल्द ही वे समूह का कामकाज देखना शुरू कर देंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि आराम करने के बाद छह महीने के अंदर वे काम पर लौट आएँगे. सुब्रत रॉय को पिछली बार एक अप्रैल को उनके दिवंगत पिता सुधीर चंद्र रॉय के जन्मदिवस समारोह के दौरान मुंबई के निकट एमबीवैली में देखा गया था. सहारा समूह के वक्तव्य में कहा गया है कि सुब्रत रॉय एमबीवैली में आराम कर रहे हैं. |
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