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हेरोइन के ख़िलाफ़ पाकिस्तान में फ़तवा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रमुख धार्मिक विद्वानों यानी उलेमा ने नशीली दवा हेरोइन पर यह कहकर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है कि यह ग़ैर-इस्लामी है. पाकिस्तान में तेज़ी से बढ़ती हेरोइन की लत को रोकने के लिए यह फ़तवा जारी किया गया है. यह फ़तवा अफ़ग़ानिस्तान के सीमांत प्रांत बलुचिस्तान में चल रहे एक सम्मेलन में जारी किया गया है. इस सम्मेलन में उलेमा के अलावा सेना के नशीली दवा विरोधी दस्ते के अधिकारी भी शामिल थे. अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की ज़ोरदार खेती के बाद पाकिस्तान में हेरोइन और अफ़ीम की खपत में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई है. हालांकि इस बीच नशीली दवाओं की तस्करी रोकने और नशे के आदी लोगों के पुनर्वास के लिए संसाधनों पर बहुत कम वृद्धि हुई है. बलुचिस्तान पहाड़ी और रेगिस्तानी इलाक़ा है और इसलिए इसे नशीली दवाओं के तस्करों के लिए स्वर्ग माना जाता है. प्रतिबंध क्वेटा के इस सम्मेलन में नशीली दवा विरोधी दस्ते के अधिकारियों के अलावा देश के जाने माने उलेमाओं को आमंत्रित किया गया था. जो फ़तवा जारी किया गया है उसका उद्देश्य उलेमाओं के माध्यम से यह संदेश देना था कि नशीली दवाओं का सेवन कुरान के ख़िलाफ़ है. इस सम्मेलन में ऐसे 40 मुफ्ती या उलेमा भाग थे जिन्हें फ़तवा जारी करने का अधिकार है. इससे पहले कुछ मौलवियों ने एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि अफ़ीम की खेती यदि दवा बनाने के लिए की जाती है तो इसकी अनुमति है. इसका खंडन करते हुए पाकिस्तान के प्रमुख इस्लामिक विद्वानों में से एक प्रोफ़ेसर अनीस अहमद कहते हैं, "इस बात पर पुराने समय से ही सभी विद्वानों का मत एक है कि जो रासायनिक पदार्थ या दवा दिग्भ्रमित करती है या जीवन की वास्तविकताओं से दूर ले जाती है वह प्रतिबंधित है." उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में इस समय पाँच लाख से ज़्यादा लोग हेरोइन के नशे के आदी हैं. पश्चिमी यूरोप में जो भी हेरोइन तस्करी करके पहुँचाई जाती है वह पाकिस्तान के रास्ते ही जाती है. |
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