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साबरमती से एक बार फिर दांडी यात्रा शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महात्मा गाँधी के साबमती आश्रम से एक बार फिर दांडी यात्रा की शुरुआत हुई है. ये यात्रा नमक बनाने पर लगी पाबंदी के विरोध में महात्मा गाँधी के द्वारा की गई दांडी यात्रा की 75वीं सालगिरह पर शुरू की गई. महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू किया था और 25 दिन बाद 241 मील की दूरी तय कर पाँच अपैल को दांडी पहुँचे. अगले दिन यानी छह मार्च 1930 को उन्होंने नमक बनाकर क़ानून तोड़ा जिसने भारत के स्वाधीनता संग्राम में एक नई ऊर्जा फूँकी. भारत के स्वाधीनता संग्राम के इसी ऐतिहासिक अवसर की याद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने शनिवार को एक नई यात्रा को रवाना किया. सोनिया गाँधी ने घोषणा की कि उन्हें गाँधीजी की विचारधारा में पूरा भरोसा है. उनका जीवन खुद एक संदेश है. सन 1930 में महात्मा गाँधी के नेतृत्व में निकाली गई दांडी यात्रा का दोबारा आयोजन कांग्रेस पार्टी और कुछ गाँधीवादी संस्थानों ने मिलकर किया है. महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी भी यात्रा में शामिल हो रहे हैं. इसे नमक सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता हैं. इस पूरी यात्रा को लेकर विभिन्न तरह के विचार सामने आ रहे हैं. गुजरात के बाहर इस यात्रा को लेकर खासा रूझान है. लेकिन ऐसी ख़बरें आ रही हैं गुजरात के लोग इसमें ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है. उद्देश्य आख़िर इस यात्रा के दोबारा निकाले जाने से क्या हासिल होने वाला है? वरिष्ठ गाँधीवादी चुनीभाई वैद्य कहते हैं कि इस यात्रा का मनोवैज्ञानिक असर होगा. कई लोग यह यात्रा करते आए हैं. यह पहली बार नहीं हो रहा. राजीव गाँधी के समय में भी एक दांडी यात्रा आयोजित की गई थी. उनका कहना है कि जो भी आदमी यह यात्रा करता हैं उस दौरान वो उन स्थानों पर से जाता हैं जहाँ से कभी गाँधी और उनके साथी गुज़रे थे. शिक्षा की दृष्टि से और हमारे दिमाग के लिए यह अच्छा हैं. पर दूसरी ओर आम लोगों का एक बड़ा वर्ग हैं जो इस यात्रा को मात्र राजनीतिक यात्रा मान रहा हैं. चुनीभाई का कहना है कि गाँधी जी का कोई डुप्लिकेट नहीं बन सकता. गाँधी जैसा महामानव कोई नहीं बन सकता. राजनीति सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का कहना हैं कि इस यात्रा का मक़सद सिर्फ़ राजनीति है और इस प्रदेश में सोनिया गाँधी का नाम नहीं चला तो अब कांग्रेस महात्मा गाँधी के नाम का लाभ उठाना चाहती हैं. भाजपा नेता जयंती बारोत का कहना हैं,'' उनका यह कार्य अच्छा हैं पर उद्देश्य मलिन राजनीतिक है. मैं जानता हूँ कि विकास करती अच्छी सरकार को गाली देने के लिए इस यात्रा का इस्तेमाल होगा. कौमी एकता की बात करके कौमी आग को भड़काने का का काम होगा.'' साथ ही यह भी कहा जा रहा हैं कि इस यात्रा से कांग्रेस मध्य गुजरात में अपनी राजनीतिक शक्ति का आकलन करना चाहती हैं. यह इलाक़ा पार्टी का गढ़ था. पर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली थी. लेकिन पर कांग्रेस इस बात से इनकार करती है. पार्टी नेता हसमुख पटेल का कहना हैं,''यह गलत बात हैं. एक तरफ राजनीति है और दूसरी तरफ एक बड़ा उद्देश्य हैं.'' उनका कहना है कि यह सिर्फ़ कांग्रेस ही नहीं आयोजित कर रही हैं, इसमें बहुत से एनजीओ भी जुड़े हैं. इसका उद्देश्य राजनीतिक नहीं हैं. अहमदाबाद से दांडी तक रह रहे लोग इस यात्रा में कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं, यह तो कुछ दिनों बाद पता चलेगा. अभी तो सिर्फ़ यह कहा जा सकता हैं कि राजनीति के लिए ही सही पर गाँधी की उस यात्रा को याद तो किया जा रहा हैं. |
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