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सुप्रीम कोर्ट में पप्पू यादव की ज़मानत रद्द | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को ज़मानत देने के पटना हाई कोर्ट के फ़ैसले को रद्द कर दिया है. पप्पू यादव इस समय कम्युनिस्ट नेता अजीत सरकार की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं. अजीत सरकार के भाई ने पटना हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. जस्टिस एन संतोष हेगड़े और जस्टिस एसबी सिन्हा की खंडपीठ ने यह फ़ैसला दिया. खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने इस बात को साबित किया है कि पप्पू यादव के ख़िलाफ़ पहली नज़र में मामला बनता है. अदालत ने पप्पू यादव के आचरण पर भी टिप्पणी की और कहा कि अभी भी इस मामले में कई गवाहों से पूछताछ होनी है और इस स्थिति में पप्पू यादव को ज़मानत देने से न्याय प्रक्रिया में बाधा आ सकती है. 'फ़ैसला ग़लत' खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में कहा कि पटना हाई कोर्ट का पप्पू यादव को ज़मानत देने का फ़ैसला ग़लत था. खंडपीठ ने कहा कि सात बार पप्पू यादव की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज हो चुकी थी और लगातार की जाने वाली अपीलों में कोई नई क़ानूनी या तथ्यात्मक बात नहीं रखी गई. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कांची के शंकराचार्य को ज़मानत दिए जाने के मामले की तुलना इस मामले से नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों मामले एक-दूसरे से तथ्यात्मक रूप में अलग हैं. पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई से यह पूछा था कि वह सुझाव दे कि सांसद पप्पू यादव को बेऊर जेल से हटाकर कहाँ रखा जाए जिससे उनकी 'असंवैधानिक गतिविधियों' पर रोक लगाई जा सके. पप्पू यादव अजीत सरकार की हत्या के मामले में पटना के बेऊर जेल में रखे गए हैं. पिछले दिनों पप्पू यादव के पास से मोबाइल फ़ोन मिला था और पता चला है कि वहाँ से उन्होंने कई महत्वपूर्ण लोगों से फ़ोन पर बात की थी. |
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