|
डाकू गिरोह की मांगों की रोचक सूची | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चंबल के डकैत दयाराम गड़रिया आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं अगर सरकार उन्हें शिवपुरी लोकसभा से टिकट देने का आश्वासन दे और उनके साथियों को 'कुछ' सुविधाएँ. इन सुविधाओं में गिरोह के हर सदस्य को दो-दो पेट्रोल पंप, दो बसों के ऑल इंडिया परमिट, दस बंदूकों के लाइसेंस, पचास-पचास बीघा ज़मीन और पाँच साल में बरी किए जाने की गारंटी शामिल है. गड़रिया गिरोह की ओर से आत्मसमर्पण के लिए ज़िला प्रशासन को भेजी गई शर्तें भी दिलचस्प हैं. इस गिरोह ने कुल 37 मांगें रखी हैं. वे हैं- हर सदस्य को खेती के लिए ट्रैक्टर देने, सभी को सर्वसुविधायुक्त मकान और फ़ोन तथा मोबाइल फ़ोन कनेक्शन दिया जाए. वे चाहते हैं कि वे सिर्फ़ पाँच साल जेल में रहेंगे जो खुली जेल हो. उन्होंने अपने लिए डबरा नाम की जगह भी चुन ली है जहाँ यह जेल हो. जेल में रहने के दौरान वे चौबीसों घंटे मुलाक़ात की सुविधा और जब मन चाहे पैरोल की सुविधा भी चाहते हैं. वे पेशी में जाने के लिए एक-एक टाटा सूमो भी चाहते हैं. बीड़ी-सिगरेट और माँस भी उन्हें हर दिन दो किलो दूध, हर चार दिन में दो-दो किलो बकरे का माँस और इसके अलावा आटा, सब्ज़ी, तेल और माचिस भी चाहते हैं.
वे आत्मसमर्पण के बदले जेल में एक मंदिर भी चाहते हैं जहाँ प्रसाद के लिए हर दिन दो किलो मिठाई भी मिले. इतने में बात ख़त्म नहीं होती वे अपने लिए स्पेशल बीड़ी का एक-एक पैकेट चाहते हैं और फ़ोर स्क्वेयर सिगरेट के पाँच पाँच पैकेट हर दिन चाहते हैं. चंबल के इलाक़े को अपने आतंक से कंपाने वाले इस गिरोह ने अपनी चिट्ठी ज़िला प्रशासन को भेजने के बाद कहा है कि उनका पत्र राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक भिजवा दिया जाए. गिरोह ने अपनी शर्तों पर विचार करने के लिए सरकार को एक महीने का समय दिया है. अधिकारियों के अनुसार उन्होंने कहा है कि सरकार अपनी राय से उन्हें रेडियो और अख़बारों के ज़रिए अवगत करा सकती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||