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समाजवादी पार्टी ने वाकआउट किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी पर एक बार फिर समाजवादी पार्टी और भाजपा-शिवसेना के बीच गर्मागर्म बहस हुई और समाजवादी पार्टी ने वाकआउट किया. लेकिन पिछले बारह सालों में शायद यह पहली बार हुआ कि छह दिसंबर को हंगामे की वजह से लोकसभा की बैठक स्थगित नहीं करनी पड़ी. सोमवार को अयोध्या की बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की बारहवीं बरसी है. छह दिसंबर 1992 को कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था. इस मामले में प्रमुख विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के तीन बड़े नेताओं पर भी षडयंत्र में शामिल होने का आरोप है. सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि जिन लोगों ने बाबरी मस्जिद गिराई थी उनकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए इसके विरोध में भाजपा और शिवसेना के सदस्यों ने हंगामा मचाना शुरु कर दिया. भाजपा के उपनेता वीके मलहोत्रा द्वारा आपत्ति किए जाने पर रामजीलाल सुमन की कुछ टिप्पणियाँ सदन की कार्यवाही से विलोपित भी की गई. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भाजपा सदस्यों ने 'जयश्री राम' के नारे लगाए. समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने छह दिसंबर को काला दिन बताते हुए वाकआउट किया. इससे पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बासुदेव आचार्य ने कहा कि सदन में इस बात पर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए कि भाजपा में शामिल होने के बाद कल्याण सिंह ने अपना बयान क्यों बदल दिया. उनका कहना था कि पहले कल्याण सिंह ने लिब्रहान आयोग के समक्ष कहा था कि बाबरी मस्जिद को गिराने की योजना भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर पर रचा गया था. |
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