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चलती फिरती टेलीफ़ोन डायरेक्ट्री हैं रामपाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आम तौर पर किसी को सौ पचास टेलीफ़ोन नंबर याद रहते हैं. लेकिन अगर किसी को सैकड़ों नहीं, हज़ारों लोगों के टेलीफ़ोन नंबर याद हों तो उसे चलती-फिरती टेलीफ़ोन डायरेक्टरी के सिवा और क्या नाम दिया जा सकता है? छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक टेलीफ़ोन एक्सचेंज में सीनियर टेक्निकल सुपरवाइज़र के पद पर काम करने वाले रामपाल ठुकराल को लोग टेलीफ़ोन डायरेक्टरी के नाम से ही जानते हैं. रामपाल का दावा है कि उन्हें 27 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों के टेलीफ़ोन नंबर याद हैं, जिसमें हर रोज़ 2 से 4 नए टेलीफ़ोन नंबरों का इज़ाफ़ा हो रहा है. आप किसी का नाम लें और रामपाल पलक झपकते उसका टेलीफ़ोन नंबर बता देते हैं. कई महत्वपूर्ण घटनाओं की तारीख़ें भी रामपाल को ज़बानी याद हैं. यही नहीं, 500 से अधिक विशिष्ठ व्यक्तियों के जन्मदिन भी रामपाल कुछ इस तरह बताते हैं, जैसे कोई अपने परिवारजनों के जन्मदिन याद रखता है. चमत्कार नहीं 56 साल के हो चुके रामपाल 11वीं कक्षा तक पढ़े हैं. वे बताते हैं कि दूरसंचार विभाग में टेक्निशियन के बतौर अपने करियर की शुरुवात करने का बाद 1970 के आस पास उन्हें लोगों के टेलीफ़ोन नंबर याद करने का शौक लगा. और लोगों के टेलीफ़ोन नंबरों को याद करने का सिलसिला शुरु हो गया. धीरे-धीरे हालत ये हो गयी कि राह चलते दुकानों पर लगे बोर्ड, दीवारों पर लगे पोस्टर और पर्चों पर छपे नंबर भी रामपाल को याद होने लगे. एक हफ्ते पहले जब रामपाल अपने बेटे के पास दिल्ली गए तो वहां भी उन्हें सौ डेढ़ सौ लोगों के टेलीफ़ोन नंबर याद हो गए. रामपाल कहते हैं- “मेरी ईश्वर में आस्था है और हर रोज़ मैं पूजा-पाठ करता हूं लेकिन टेलीफ़ोन नंबरों के याद होने के मामले में किसी दैवीय चमत्कार की कोई भूमिका मैं नहीं मानता. ये विशुद्ध रुप से मेरे अभ्यास और परिश्रम का फल है.” रामपाल का दावा है कि आज उन्हें भारत संचार निगम लिमिटेड और एक निजी कंपनी के कम से कम 27 हज़ार टेलीफ़ोन नंबर याद हैं. इनमें राजधानी रायपुर के अलावा देश के दूसरे शहरों के विशिष्ठ लोगों के नंबर भी शामिल हैं. जिसमें फ़िल्म अभिनेताओं से लेकर देश के राष्ट्रपति तक का नाम शामिल है. फ़ायदा आम तौर पर किसी चीज़ को याद करने के लिए दृश्य तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके तहत उस शब्द या विषय को याद करने के लिए उससे संबंधित किसी दृश्य को याद कर लिया जाता है. युवा चिकित्सक अवधेश कुमार कहते हैं- “मष्तिष्क का बायाँ हिस्सा क्रमबद्धता, गणना व तार्किकता के आधार पर और दायां हिस्सा रंग, कल्पना व फैंटसी के आधार पर किसी चीज़ को याद रख पाता है. सामान्यतः हम में से अधिकांश लोग इनका इसी रुप में इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. रामपाल इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए उन्हें टेलीफ़ोन नंबर को याद करने में मुश्किल नहीं होती.” रामपाल की इस याददाश्त का फ़ायदा दूरसंचार विभाग को भी ख़ूब मिलता है. किसी का नंबर याद नहीं आ रहा हो या किसी का पुराना टेलीफ़ोन नंबर क्या था, यह जानने के लिए अधिकांश लोग टेलीफ़ोन डायरेक्टरी में नंबर तलाशने का कष्ट जब नहीं उठाना चाहते तो उनके लिए रामपाल हमेशा एक बेहतर विकल्प की तरह उपस्थित रहते हैं. दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी रामपाल की इस उपलब्धि को दूरसंचार विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हुए तर्क देते हैं कि अगर देश भर में रामपाल जैसे कर्मचारी हो जाएं तो बड़ी संख्या में कंप्यूटरों की छुट्टी हो जाएगी. इसके अलावा समय की बचत होगी वो अलग. दूरसंचार विभाग में ही काम करने वाले उनके मित्र संपत्त राम कहते हैं- “रामपाल के साथ होने से हमारा काम हमेशा आसान हो जाता है. हम तो चाह कर भी एक सौ नंबर बमुश्किल याद कर पाते हैं लेकिन रामपाल का तो जवाब ही नहीं है.” रामपाल चाहते हैं कि इस उपलब्धि के लिए उनका नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया जाना चाहिए. हालांकि इसके लिए उन्होंने अब तक कोई विधिवत आवेदन नहीं किया है. |
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