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हाइकोर्ट के 300 जजों की नियुक्ति शीघ्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने उच्च न्यायालयों में लंबित पड़े मामलों को निपटाने के लिए 300 से ज़्यादा जजों की शीघ्र नियुक्ति का फ़ैसला किया है. भारत के विधिमंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा है कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का 70 से 80 प्रतिशत तक काम पूरा किया जा चुका है. मुंबई में आयोजित एक परिचर्चा में उन्होंने कहा कि 300 न्यायाधीशों की जल्दी ही नियुक्ति किए जाने के बाद 200 अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति सन् 2005 तक कर ली जाएगी. बीबीसी के मुंबई संवाददाता ज़ुबैर अहमद के अनुसार भारद्वाज ने कहा कि यह काम बहुत ज़रूरी है क्योंकि अदालतों में ऐसे मुक़द्दमों की संख्या बढ़ती जा रही है जिनका निपटारा नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि सरकार यह चाहती है कि वाणिज्यिक, वैवाहिक और अन्य नागरिक मुक़द्दमे अदालतों के बाहर मध्यस्थता के ज़रिए ही निपटा लिए जाएँ. उन्होंने कहा कि सरकार इस काम में सहयोग करेगी और यह निश्चित करेगी कि इस तरह अदालत के बाहर निपटाए गए मामलों को वापस अदालत में न घसीटा जाए. वैकल्पिक केंद्र विधि मंत्री ने ऐसे विवादों के निपटारे के लिए वैकल्पिक केंद्र बनाने का भी सुझाव दिया है और कहा है कि इस काम में विदशी निवेशकों की भी काफ़ी रुचि होगी. इस मौक़े पर भारत के सर्वोच्च न्यायाधीश आरसी लाहोटी ने कहा है कि वैकल्पिक केंद्रों की स्थापना सारे देश में की जानी चाहिए लेकिन महाराष्ट्र में विशेष रूप से, क्योंकि महाराष्ट्र विदेशी निवेशकों की दृष्टि में एक प्रगतिशील राज्य है. उन्होंने कहा सर्वोच्च न्यायालय में हर साल 40 हज़ार मुक़द्दमों का निपटारा किया जाता है लेकिन फिर भी 27000 से ज़्यादा मामले बिना निपटाए पड़े हुए हैं. छोटी अदालतों में तो एक करोड़ से भी ज़्यादा मामले लंबित पड़े हैं. |
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