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'न्याय में खर्च और देरी को दूर करना चाहते हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के नए क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज का कहना है कि देश की क़ानून व्यवस्था में सिर्फ़ दो ख़ामियाँ हैं, एक तो इसमें खर्च बहुत आता है दूसरा इसमें देर बहुत होती है. 'बीबीसी के साथ आपकी बात' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे इन दोनों कमियों को अपने कार्यकाल में ही दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि आम आदमी को न्याय पाने के लिए ख़र्च कम करना पड़े और उसे न्याय समय पर ही मिल जाए. हंसराज भारद्वाज ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देर नहीं होनी चाहिए और इसके प्रयास उन्होंने शुरु कर दिए हैं. उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति लिए न्यायिक आयोग बनाने की ज़रुरत को ख़ारिज करते हुए कहा कि वर्तमान प्रणाली एकदम दुरुस्त है. न्यायालयों में भ्रष्टाचार के बारे में उन्होंने कहा कि पद संभालते ही उन्होंने इस बारे में देश के मुख्य न्यायाधीश से बात की है और ज़रुरी क़दम उठाए जा रहे हैं. क़ानून मंत्री का कहना था कि जनता को भी सामने आकर इसमें सहयोग करना चाहिए और भ्रष्टाटार को उजागर करना चाहिए. सबके लिए क़ानून बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उस मामले से बड़े लोग जुड़े हुए थे इसलिए कोशिश हुई कि उसमें देरी हो. इसी तरह गुजरात के मामले में उनका कहना था कि आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने दख़ल देकर मामले को संभाल लिया है. उन्होंने कहा कि गुजरात में न्याय प्रक्रिया को चलाने वाले निष्क्रिय हो गए इसलिए सारी गड़बड़ी हुई हम इसकी जाँच करेंगे कि ऐसा क्यों हुआ और अब सरकार यह व्यवस्था करने जा रही है कि भविष्य में ऐसा न हो. उन्होंने इस बात से इंकार किया कि देश में क़ानून बड़े लोगों के लिए नहीं है. उनका कहना था कि चाहे जितना भी बड़ा या पहुँच वाला व्यक्ति हो, वह देश की न्यायिक प्रक्रिया से बचकर नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि ऊँचे पदों पर बैठा आदमी मामले को प्रभावित करने की कोशिश तो करता है लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि वह इस प्रक्रिया से बच जाए. देश के आपराधिक क़ानूनों के बारे में उन्होंने कहा कि यह दुनिया के सबसे अच्छे क़ानूनों में से एक है और इसमें समय समय पर आवश्यक बदलाव किए गए हैं. |
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