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मंगलवार, 12 अक्तूबर, 2004 को 18:14 GMT तक के समाचार
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'ग़लती स्याही बनाने वाली कंपनी की नहीं'

अफ़ग़ानिस्तान चुनाव
आरोप है कि एक बार इस्तेमाल के बाद स्याही मिट गई
भारत की पेंट बनाने वाली एक कंपनी मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुनाव में अमिट स्याही वाले जिस पेन का इस्तेमाल किया गया उसे चुनावों में गड़बड़ी के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुनाव के बाद कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि कई मतदाताओं ने कई बार अपने वोट डालें क्योंकि मतदाताओं की ऊंगली पर लगाई गई स्याही आसानी से मिटाई जा सकती थी.

कंपनी का कहना है कि इस समस्या का संबंध कुछ मतदान केंद्रों पर कर्मचारियों के बीच ग़लतफ़हमी से जुड़ा हुआ है.

राष्ट्रपति चुनाव में धाँधली के आरोपों के कारण वहाँ मतगणना का काम रोक दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र की एक समिति को इसकी जाँच के लिए कहा गया है.

ग़लती

भारतीय राज्य कर्नाटक की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मैसूर एंड वार्निश लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर सी हरकुमार ने बीबीसी को बताया, "कई जगह मतदान कर्मचारियों ने ग़लतफ़हमी के कारण काग़ज़ पर इस्तेमाल होने वाले मार्कर पेन का इस्तेमाल मतदान के लिए कर दिया जबकि अमिट स्याही वाला मार्कर पेन उन्हें अलग से उपलब्ध कराया गया था."

 कई जगह मतदान कर्मचारियों ने ग़लतफ़हमी के कारण काग़ज़ पर इस्तेमाल होने वाले मार्कर पेन का इस्तेमाल मतदान के लिए कर दिया जबकि अमिट स्याही वाला मार्कर पेन उन्हें अलग से उपलब्ध कराया गया था
सी हरकुमार, मार्केटिंग मैनेजर

उन्होंने कहा कि मतदान कर्मचारियों की ग़लती के लिए कंपनी को कैसे ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

कंपनी के क्वालिटी मैनेजर मणिवनन ने बताया कि इन आरोपों से कंपनी की प्रतिष्ठा को धक्का नहीं पहुँचेगा.

उन्होंने बताया कि अमिट स्याही को दिल्ली स्थित नेशनल फ़िजिकल लेबोरेट्री के फ़ॉर्मूला के आधार पर बनाया गया था.

इस्तेमाल

उन्होंने बताया कि भारत में 50 साल से ज़्यादा समय से इसका इस्तेमाल किया जाता है और इसे कई अफ़्रीकी देशों, कंबोडिया, नेपाल और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में भेजा भी जाता है.

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कंपनी ने 50 हज़ार मार्कर पेन भेजे

मैसूर पेंट्स भारत की अकेली ऐसी कंपनी है जो अमिट स्याही बनाती है. इसकी बनाई स्याही पिछले पाँच दशकों से चुनाव के दौरान इस्तेमाल होती है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि सैम विडाना गमाची ने मैसूर में कंपनी का कामकाज देखने के बाद ही कंपनी को यह काम सौंपा था.

उन्होंने स्याही की बोतल की जगह 50 हज़ार मार्कर पेन का ऑर्डर दिया था. 50 हज़ार मार्कर पेन अफ़ग़ानिस्तान भेजे गए जबकि पाकिस्तान के शरणार्थी शिविर में रह रहे अफ़ग़ान मतदाताओं के लिए स्याही की बोतल भेजी गई.

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