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उत्तर प्रदेश के नए ज़िले बने रहेंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के नए ज़िलों के मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फ़ैसले को रद्द करने से इनकार कर दिया है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के उस निर्णय को उलट दिया था जिसमें उन्होंने नौ नए ज़िलों और चार आँचलिक मुख्यालयों के निर्माण के निर्णय को रद्द कर दिया था. उच्च न्यायालय के फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी. सर्वोच्च न्यायालय के इस फ़ैसले को मुलायम सिंह सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका माना जा रहा है. दरअलस नए ज़िले और चार नए आँचलिक मुख्यालय बनाने का निर्णय मुलायम सिंह की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बसपा नेता मायावती ने लिया था. इसके बाद 13 जनवरी 2004 को मुलायम सिंह यादव ने सभी नौ ज़िलों और चार आंचलिक मुख्यालयों को रद्द करने की घोषणा कर दी थी. उनका तर्क था कि इससे नए ज़िलों के निर्माण पर होने वाले भारी भरकम खर्च को रोका जा सकेगा और इस राशि का उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा. इनमें से कुछ ज़िले तो छह साल पहले बनाए गए थे. गत 21 मई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनके इस फ़ैसले के विरुद्ध फ़ैसला देते हुए कहा था कि नए ज़िलों का निर्माण नहीं रोका जा सकता. जिन नए ज़िलों के निर्माण की घोषणा की गई थी वे श्रावस्ती, महामाया नगर (हाथरस), ज्योतिबा फुले नगर (अमरोहा), संत कबीर नगर, कौशांबी, औरैया, गौतम बुद्ध नगर, चंदौली, और अंबेडकर हैं. इनके अलावा चार आंचलिक मुख्यालयों में बस्ती, देवी पाटन, सहारनपुर और मिर्ज़ापुर हैं. फिलहाल सभी पक्षों को नोटिस जारी किया गया है. इस मामले में अंतिम फ़ैसले के लिए अभी और सुनवाई होगी. तब तक नए ज़िले अस्तित्व में रहेंगे. |
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