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शहबाज़ शरीफ़:राजनीति और निर्वासन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मियाँ मोहम्मद शहबाज़ शरीफ़ का संबंध पाकिस्तनी पंजाब के उस परिवार से है जिसने स्टील उद्योग में काफ़ी धन कमाया है. उनके बड़े भाई मियाँ नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं और उन्हें अक्तूबर 1999 में तत्कालीन सेनाध्यक्ष परवेज़ मुशर्रफ़ ने सत्ता से हटा दिया था. शहबाज़ शरीफ़ ने राजनीति में अपना करियर 1993 में पंजाब विधान सभा का सदस्य चुने जाने के साथ शुरू किया और वह 1996 तक सदस्य रहे. उन्होंने जल्दी ही विधान सभा के एक सक्षम और कुशल स्पीकर की छवि बनाई और 1997 में मुख्यमंत्री बनकर 1999 तक इस पद पर रहे. शहबाज़ शरीफ़ के प्रशंसकों का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराईं जिनमें बहुत सी नई सड़कें और पुल शामिल रहे हैं. पंजाब की राज्य सिविल सेवा में भी बहुत से सुधारों का श्रेय शहबाज़ शरीफ़ को जाता है. आरोप लेकिन शहबाज़ शरीफ़ के आलोचकों का कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान काफ़ी कुछ ख़राब भी रहा है. उन पर आरोल लगाया जाता है कि 1998 में उन्होंने पुलिस हिरासत में मौजूद पाँच संदिग्ध अपराधियों को मारे जाने के आदेश दिए थे. पिछले साल जुलाई में पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने उन्हें उस मामले में वांछित और फ़रार घोषित कर दिया. शहबाज़ शरीफ़ के समर्थक कहते हैं कि 2000 में नवाज़ शरीफ़ को देश से बाहर निकाले जाने के बाद उनके पास भी देश छोड़ देने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा था. लेकिन सरकार का कहना है कि शहबाज़ ने तमाम शरीफ़ परिवार के साथ इस वादे के साथ देश छोड़ा था कि वे दस साल तक फिर से देश वापस नहीं लौटेंगे. |
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