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वो धुँधली सी तस्वीर का बच्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुछ ही साल पुरानी बात है. दिल्ली से उड़कर लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरा. मन में एक अजीब सी घबराहट थी और साथ ही उभर रही थी एक धुंधली सी तस्वीर. जब तस्वीर थोड़ी साफ़ हुई तो नज़र आया एक छोटा सा बच्चा जो एक हाथ से अपनी खिसकती हुई पैंट को संभाल रहा था और दूसरे हाथ से साइकिल की एक पुरानी जंग लगी हुई रीम को डंडे की मदद से गाँव के तालाब के चारों ओर दौड़ा रहा था. अपनी धुन में दौड़ता हुआ वो गाँव की सरहद पार कर गया और जब उसे उसका अहसास हुआ तो बिल्कुल सहमे अंदाज़ में रूँआसी सी शक्ल लेकर भागा अपने घर की ओर. हीथ्रो हवाई अड्डे पर कुछ वैसा ही अहसास हुआ था मुझे. लेकिन इस बार इतनी दूर निकल आया था कि घर का रास्ता कहीं से भी नज़र नहीं आया. आज सालों बाद बीबीसी के कारवाँ में शामिल होकर पहुँचा उत्तरी बिहार के दरभंगा शहर में तो बीबीसी के हज़ारों सुनने वाले मिले वहाँ, और पलकों पर बिठाया उन्होंने. लेकिन उस बड़ी भीड़ में बार बार नज़र दौड़ाने पर भी कोई जाना पहचाना चेहरा नहीं दिखा. एक तलाश मन अधीर हो रहा था. और जब नहीं रहा गया तो थोड़ा सा समय निकाल कर गाड़ी लेकर निकल पड़ा उसी गाँव की ओर जहाँ उस बच्चे को देखा था.
तालाब जस का तस वहीं था, पानी से लबालब भरा हुआ. जाने पहचाने चेहरे भी नज़र आने लगे जिन्हें बचपन में हट्टे कट्टे जवान के रूप में देखा था, अब उनके चेहरों पर झुर्रियां दिखने लगी थीं. गाँव के मंदिर के बाहर पहुँचा तो लगा अब भी बाबा शिवलिंग के सामने डमरू बजाते हुए तांडव का पाठ कर रहे हैं. आँगन के बाहर लगे आम के पेड़ पर इस बार बौर ज़्यादा नहीं नज़र आया. किसी ने कहा पिछले साल यह पेड़ काफ़ी फला था इसलिए इस बार ज़्यादा नहीं फलेगा. उसी पेड़ के बगल में दालान पर बैठा जहाँ कभी लालटेन की रौशनी में पहाड़े याद किए थे. घर के अंदर बाबा की गोद में बैठे हुए मेरे बचपन की तस्वीर दिखी. फ्रेम की हुई वह तस्वीर पीली पड़ रही थी लेकिन ध्यान से देखा तो तालाब के किनारे भागता हुआ वो बच्चा वही था जो उस तस्वीर में था. मन को अचानक अनोखी शांति का अनुभव हुआ. शायद सालों तक भागते रहने के बाद अपनी जड़ों के पास पहुंचने का अहसास था वो. आम के पत्तों से छनकर आती हुई फागुन की हवा ने मानो सारी थकान भी दूर कर दी थी. ड्राइवर श्रीखंड प्रसाद गाड़ी स्टार्ट कर चुका था. अभी तो सफ़र की शुरूआत ही थी. |
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