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मच्छरों से परेशान व्यक्ति ने मुआवज़ा माँगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आँध्रप्रदेश में मच्छरों के सताए एक व्यक्ति ने अपनी नगर परिषद से मुआवज़े की माँग की है. के श्रीहरि राव ने कहा है उन्हें मच्छरों से बचाने के लिए कुछ नहीं किया गया और यदि उन्हें मुआवज़ा नहीं दिया जाता तो वे नगर परिषद के ख़िलाफ़ दावा करेंगे. उनका कहना है, "मैं और मेरा परिवार मच्छरों से बहुत दुखी हैं. हम रात को सो नहीं पाते और हमें मलेरिया से बचने के लिए दवाएँ खानी पड़ी हैं." राव के मुआवज़े की माँग हाल में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर आधारित है जिसमें कहा गया था कि ये नागरिक प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि मच्छरों का सफ़ाया किया जाए. लेकिन आँध्रप्रदेश में कोव्वूर नगर परिषद के अधिकारियों पर राव की इस धमकी का ज़्यादा असर नहीं हुआ है. नगर परिषद के वकील ए साई बाबा ने बीबीसी से कहा, "उनके पास क्या प्रमाण है कि उन्हें कोई विशेष नुकसान हुआ है जो अन्य लोगों को नहीं हुआ? यदि किसी को कोई मच्छर काट लेता है या फिर किसी के सर पर मक्खी भिनभिनाने लगती है तो आप इसके लिए नगर परिषद को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते." उन्होंने तो राव की पंद्रह हज़ार रुपए के मुआवज़े की माँग को सीधे ख़ारिज कर दिया. उनका कहना था, "यदि हम उन्हें मुआवज़ा देते हैं तो हमें मुआवज़ा देने के लिए विशेष प्रावधान करने होंगे क्योंकि हर व्यक्ति मुआवज़े की माँग करने लगेगा." उनका कहना था कि दिल्ली उच्च न्यायालय का फ़ैसला इस मामले में लागू नहीं होता क्योंकि यहाँ नगर परिषद सब एहतियात बरत रही है. नगर परिषद के आयुक्त ए रामाकृष्णा कहते हैं, "हमारे पास पैसे की कमी नहीं और नियमित तौर पर हम सफ़ाई और मच्छर मारने की दवा का छिड़काव कर रहे हैं." |
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