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राणा के फ़रार होने की मजिस्ट्रेट जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में फूलन देवी हत्याकांड में प्रमुख अभियुक्त शेर सिंह राणा के तिहाड़ जेल से नाटकीय ढंग से फ़रार होने की घटना की मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए हैं. पुलिस ने राणा के बारे में जानकारी देने वाले को पचास हज़ार रुपए के ईनाम की भी घोषणा की गई है. दिल्ली के पुलिस महानिदेशक (जेल प्रशासन) अजय अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि मजिस्ट्रेट जाँच में ही यह पता चल पाएगा कि ग़लती कहाँ हुई. समाजवादी पार्टी की सांसद फूलन देवी की जुलाई 2001 में दिल्ली में उनके निवास के बाहर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में शेर सिंह राणा सहित पाँच लोगों पर मुक़दमा चल रहा है. अजय अग्रवाल ने बताया कि शेर सिंह राणा को मंगलवार को हरिद्वार की एक विशेष अदालत में पेश किया जाना था. मंगलवार सुबह छह बजकर पचपन मिनट पर एक पुलिस कांस्टेबल तिहाड़ जेल पहुँचा, उसने हथकड़ी ली हुई थी और कहा कि वह राणा को ले जाने के लिए आया है. "जिसके बाद राणा को उस 'कांस्टेबल' के हवाले कर दिया गया." अजय अग्रवाल के मुताबिक़ उसके क़रीब एक घंटे बाद दिल्ली आर्म्स पुलिस का एक कांस्टेबल आया और उसने शमशेर सिंह राणा को ले जाने की बात कही. "तब पता चला कि शेर सिंह राणा को कोई नक़ली कांस्टेबल ले गया और इस तरह राणा फ़रार हो चुका है." जब अजय अग्रवाल से यह पूछा गया कि क्या राणा को उस कांस्टेबल के हवाले करते समय काग़ज़ात की सही तौर पर जाँच नहीं की गई तो उनका जवाब था कि गड़बड़ी कहाँ हुई इसका पता तो मजिस्ट्रेट जाँच के बाद ही चल पाएगा. तिहाड़ जेल अजय अग्रवाल ने बताया कि तिहाड़ जेल दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी जेल हैं और इस समय वहाँ 12 हज़ार 644 क़ैदी हैं. "1000 से 1500 क़ैदी हर रोज़ अदालतों में पेश होने के लिए ले जाए जाते हैं और 10 से 15 क़ैदियों को हर रोज़ दिल्ली से बाहर ले जाया जाता है." |
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