BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 16 फ़रवरी, 2004 को 17:56 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
गाँधी परिवार का सदस्य भाजपा में
वरुण गाँधी और उनकी माँ मेनका गाँधी
इंदिरा गाँधी की एक बहू और पोते ने अलग राह ली
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के परनाती और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के पोते वरुण गाँधी अपनी माँ मेनका गाँधी के साथ भारतीय जनता पार्टी में में शामिल हो गए हैं.

नेहरू-गाँधी परिवार को एक तरह से काँग्रेस की परंपरा कहा जाता है और यह पहला मौक़ा है कि इस परिवार के कोई सदस्य काँग्रेस छोड़कर कट्टरपंथी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं.

ख़ासतौर से यह मौक़ा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में आम चुनाव होने वाले हैं और इंदिरा गाँधी की बड़ी बहू सोनिया गाँधी और उनके पोता-पोती राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के राजनीति में आने की अटकलों के बीच इसे भाजपा एक पैंतरे के रूप में देखा जा रहा है.

इंदिरा गाँधी परिवार की छोटी बहू मेनका गाँधी 1980 में एक विमान दुर्घटना में अपने पति संजय गाँधी की मौत के कुछ साल बाद अपनी सास से दूर हो गई थीं और राष्ट्रीय गठबंधन सरकार में तो वह मंत्री भी रह चुकी हैं.

हाल के वर्षों में मेनका गाँधी ख़ासतौर से पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं.

देश की राजनीति

भारत में अब तक हुए 12 प्रधानमंत्रियों में से तीन नेहरू-गाँधी परिवार से ही रहे हैं.

इनमें सबसे पहले थे जवाहर लाल नेहरू, फिर उनकी बेटी इंदिरा गाँधी और उनके बेटे राजीव गाँधी.

प्रियंका गाँधी
प्रियंका के राजनीति में आने के संकेत

काँग्रेस ने देश पर क़रीब 36 साल तक शासन किया है और इसमें ज़्यादातर समय पार्टी की रहनुमाई इसी परिवार के पास रही.

जानकारों का कहना है कि प्रियंका और राहुल गाँधी की लोकप्रियता की काट के रूप में वरुण गाँधी को तलाशा गया है.

जानकारों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी वरुण गाँधी को चुनाव में प्रियंका और राहुल गाँधी के मुक़ाबले में भुनाएगी.

नेहरू-गाँधी परिवार को दो प्रधानमंत्रियों इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की हत्या हो चुकी है इसलिए इस परिवार की बड़ी बहू सोनिया गाँधी के साथ-साथ राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी की लोगों में ख़ासी लोकप्रियता है.

चुनाव नहीं

वरुण गाँधी ने भारतीय जनता पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की इनमें ख़ुद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के नाम प्रमुख हैं.

वरुण गाँधी अभी चुनाव नहीं लडेंगे क्योंकि उनकी उम्र अभी 24 साल है और लोक सभा का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल होनी चाहिए.

अब देखा जाए तो नेहरू-गाँधी परिवार सत्ता और विपक्ष दोनों में सक्रिय है.

वरुण गाँधी ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि वह अपने चचेरे भाई-बहन राहुल और प्रियंका गाँधी के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते.

"मैं अपने परिवार के ख़िलाफ़ प्रचार करने से बचने की कोशिश करूँगा. मैं किसी पर कोई तोहमत लगाने में भरोसा नहीं करता."

जानकारो का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी राहुल और प्रियंका गाँधी की बढ़ती लोकप्रियता से ख़ासी चिंतित है.

राहुल और प्रियंका गाँधी हाल के दिनों में राजनीति में काफ़ी सक्रिय नज़र आने लगे हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>