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बुधवार, 11 फ़रवरी, 2004 को 19:58 GMT तक के समाचार
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बोडो छात्राओं की पोशाक पर विवाद

बोडो इलाक़े में ड्रेस कोड
अब छात्राओं को ऐसी पोशाक पहनने को कहा गया है
असम की बोडो आबादी वाले कोकराझार ज़िले में सबसे ताकतवर संगठन अखिल बोडो छात्र संघ (एबीसयू) ने अब जम्मू कश्मीर के चरमपंथियों की तर्ज़ पर समाज में नैतिकता की बहाली का बीड़ा उठा लिया है.

उसने बोडो और अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों में आठवीं से 12वीं तक की छात्राओं के लिए ड्रेस कोड तय करते हुए पारंपरिक बोडो पोशाक 'डोखना' पहनना ज़रूरी कर दिया है.

संगठन की कोकराझार शाखा ने हाल में अपने सालाना सम्मेलन में पारित एक प्रस्ताव में कहा है कि छात्राओं को स्कूल ड्रेस के तौर पर अपनी पारंपरिक पोशाक ही पहननी होगी.

एबीएसयू के निर्देश से छात्राओं में ख़ासी नाराज़गी है.

10वीं में पढ़ने वाली सुमति बासुमतारी कहती हैं, "पश्चिमी पहनावे के मौजूदा दौर में 'डोखना' पहनकर स्कूल जाने का निर्देश बेतुका है."

वो कहती हैं कि जातीय पहचान बचाने के नाम पर ऐसा निर्देश थोपना उचित नहीं.

उनका कहना है कि कश्मीर में चरमपंथियों की ओर से बुर्का पहनने का निर्देश देने की बात तो सुनी थी लेकिन अब यहाँ भी ऐसा सुनकर अजीब लगता है.

एक अन्य छात्रा उर्मिला ब्रह्मा कहती हैं, " उत्सवों-त्योहारों के मौक़े पर तो हम अपनी पारंपरिक पोशाक ही पहनते हैं. कई छात्राएँ स्कूल भी यही पहनकर जाती हैं. लेकिन सबको इसके लिए मज़बूर करना ठीक नहीं."

दरअसल, लंबे आंदोलन के बाद हाल में बोडोलैंड स्वायत्त परिषद की जगह बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के गठन के बाद से ही एबीएसयू के हौसले बुलंद हैं और वो समाज में अपने स्तर नियम-क़ानून थोप रहा है.

माँग

संघ ने असमिया और बंगला माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले बोडो जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए बोडो भाषा की पढ़ाई भी अनिवार्य करने की माँग उठाई है.

 उत्सवों-त्योहारों के मौक़े पर तो हम अपनी पारंपरिक पोशाक ही पहनते हैं. कई छात्राएँ स्कूल भी यही पहनकर जाती हैं. लेकिन सबको इसके लिए मज़बूर करना ठीक नहीं
एक छात्रा

बोडो ही परिषद की कामकाज की भाषा होगी. वैसे इसमें बंगला और असमिया भाषाओं को भी मान्यता दी गई है.

बोडो जाति के राजभाषा सदस्य यूजी ब्रह्मा कहते है कि भाषा के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद अब बोडो छात्र अपनी मातृभाषा में ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं.

वे बोडो माध्यम के स्कूलों की बदहाली पर चिंता जताते हुए कहते हैं कि स्कूलों को अपना स्तर सुधारना होगा.

एबीएसयू ने बोडो स्वायत्त परिषद के इलाक़े में शिक्षा के स्तर और छात्र-छात्राओं की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए ज़िला स्तर पर निगरानी समितियाँ गठित करने का भी फ़ैसला किया है.

हथियार डाल चुके चरमपंथी गुट बोडो लिबरेशन टाइगर्स के नेता परिषद का प्रशासनिक ज़िम्मा संभाल रहे हैं.

ऐसे में एबीएसयू अध्यक्ष रविराम नरजारी ने संघ के लिए एक नई भूमिका गढ़ी है.

यह भूमिका है समाज में नैतिकता और प्राचीन परंपराओं की जड़ों को मज़बूत करने का.

वे कहते हैं, "एबीएसयू अब बोडो स्वायत्त परिषद के कामकाज के अलावा इस बात पर भी नज़र रखेगा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ हुए समझौते को सही ढंग से लागू किया जा रहा है या नहीं."

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