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तेज़ाब हमलों के ख़िलाफ़ अभियान
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भारत में महिलाओं पर तेज़ाब से हमलों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इस मामले में लोग सतर्क होने लगे हैं.

तेज़ाब से हमलों का मुक़ाबला करने के लिए कर्नाटक में कुछ महिला और सामाजिक संगठनों ने मिलकर एक अभियान चलाया है जिसका नाम 'महिलाओं पर तेज़ाब हमलों के ख़िलाफ़ अभियान और संघर्ष' रखा गया है.

कर्नाटक में पिछले दो साल में महिलाओं पर तेज़ाब से हमलों की 22 घटनाएं हुई हैं.

हाल ही में मुंबई में एक चलती रेलगाड़ी पर तेज़ाब की बोतल फेंकी गई थी जिसमें कई लोग घायल हो गए थे.

तेज़ाब फेंके जाने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं जिनमें कुछ महिलाओं की मौत हो जाती है और कुछ का चेहरा बहुत ख़राब हो जाता है.

बढ़ती चिंता

इस अभियान में शामिल एक महिला संगठन 'महिला जागृति' के साथ काम करने वाली सुषमा वर्मा का कहना था, "ऐसे हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ ही हैं. हमारा मक़सद तेज़ाब से किए जाने वाले हमलों को रोकना और जो महिलाएं इन हमलों का शिकार होती हैं उनको न्याय दिलाना है."

चिंता
 तेज़ाब हमले किसी ख़ास जाति, वर्ग, व्यवसाय या धर्म की महिलाओं तक ही सीमित नहीं हैं और ऐसे हमलों की शिकार शहरों और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं भी होती हैं.
सुषमा वर्मा

महिला कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की प्रवृत्ति ने अब तेज़ाब हमलों के रूप ले लिया है.

सुषमा वर्मा का कहना था, "तेज़ाब हमले किसी ख़ास जाति, वर्ग, व्यवसाय या धर्म की महिलाओं तक ही सीमित नहीं हैं और ऐसे हमलों की शिकार शहरों और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं भी होती हैं."

इन संगठनों की माँग है कि तेज़ाब हमलों को सरकार महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा का ही एक हिस्सा माने.

ये संगठन महिलाओं पर तेज़ाब से होने वाले हमले रोकने के लिए नए क़ानून बनाने की माँग के साथ याचिका भी दायर करने की योजना बना रहे हैं.

इन संगठनों हाल ही में बंगलौर में एक आम सभा की थी जिसमें तेज़ाब के हमलों से प्रभावित महिलाओं का दुख दर्द सुना गया.

इस मौक़े पर मौजूद जूरी ने सिफ़ारिश की थी कि तेज़ाब से हमला जैसे घोर अपराध करने वालों को उम्र क़ैद की सज़ा का प्रावधान किया जाना चाहिए.

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तेज़ाब हमला अक्सर चेहरे पर होता है

महिला जागृति का मानना है सरकार को तेज़ाब से हमला करने का इरादा करने वालों को सख़्त संदेश देना चाहिए.

बंगलौर के पुलिस आयुक्त एस मरिस्वामी भी इससे सहमति व्यक्त करते हुए कहते हैं, "कड़े क़ानून बनने चाहिए. यह एक ऐसा अपराध है जो प्रभावित होने वाले का जीवन ख़राब कर देता है."

मरिस्वामी ने बीबीसी से कहा, "उम्र क़ैद का प्रावधान होने से ज़रूर फ़र्क़ पड़ेगा."

अभिशाप

मैसूर की 25 वर्षीय एमजी शांति पर उनके पति ने ही तेज़ाब डाल दिया था जिससे उनका चेहरा ही पहचान के लायक़ नहीं बचा है.

वह अपने जीवन को ही अभिशाप मानने लगी हैं लेकिन कहती हैं कि जीना उनकी विवशता है.

"मेरी हालत बहुत ख़राब है. मेरे दो बच्चे हैं जो मेरे पास आने से डरते हैं. मेरी समझ में नहीं आता कि क्या करूँ. हर दिन एक अभिशाप है."

एक अन्य घटना में तटीय कर्नाटक के हनोवर शहर में रहने वाली नगमा पर तेज़ाब से हमला किया गया था और वह समय पर सहायता नहीं मिलने की वजह से जीवित नहीं बच सकी थीं.

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