|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंधा करने का अदालती आदेश
'ख़ून का बदला ख़ून'. कुछ यही सिद्धांत अपनाया पाकिस्तान में एक अदालत के न्यायाधीश ने जब उन्होंने आदेश दिया कि एक व्यक्ति की आँखों में तेज़ाब डाल कर उसे अँधा कर दिया जाए. इस आदमी ने यही किया था अपनी मंगेतर के साथ जब उसने शादी से इनकार कर दिया. आदमी ने अपना अपराध क़ुबूल भी कर लिया है. पंजाब प्रांत की एक आतंकवाद-निरोधक अदालत के न्यायाधीश अफ़ज़ल शरीफ ने कहा कि इस्लामी क़ानून के हिसाब से अपराधी को यही सज़ा मिलनी चाहिए. बहावलपुर के रहने वाले इस व्यक्ति ने अब से लगभग आठ महीने पहले अपने एक साथी के साथ मिलकर उस लड़की और उसकी एक सहेली के ऊपर तेज़ाब डाला था.
लड़की की दोनों आँखें चली गईं और उसका शरीर भी जगह-जगह से जल गया. न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा है कि उस क्षेत्र के चिकित्सा अधिकारी को एक खुले मैदान में सबके सामने मुजरिम की आँखों में तेज़ाब टपकाना होगा. अभियोग पक्ष के वकील मुमताज़ हुसैन ने बीबीसी को बताया कि अदालत ने सज़ा सुनाने से पहले बहावलपुर अस्पताल के नेत्र-विशेषज्ञ को बुलाया और उनसे मशविरा किया. पहली बार कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में यह इस तरह की पहली घटना है. सरकारी वकील उम्मीद ज़ाहिर कर रहे हैं कि ऊँची अदालतें इस आदेश को पलटेंगी नहीं और यह उन लोगों के लिए एक मिसाल क़ायम करेगा जो महिलाओं को नुक़सान पहुँचाते हैं. कई बार ऐसा देखा गया है कि ऊपरी अदालतें निचली अदालतों के शरिया पर आधारित फ़ैसलों को रद्द कर देती हैं. क्षेत्र के एक पत्रकार का कहना है कि पिछले एक साल में महिलाओं पर तेज़ाब डालने की चार घटनाएँ हुई हैं. इनमें से एक घटना में कई बच्चे बुरी तरह जल गए थे और कुछ लोगों की मौत भी हो गई थी. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||