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सोमवार, 26 जनवरी, 2004 को 16:22 GMT तक के समाचार
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गुजरात के दंगों की धमक अमरीका तक

गुजरात में हिंदू मंदिर
अमरीका में हिंदुओं में कट्टरपंथ बढ़ता देखा जा रहा है

न्यूयॉर्क में बास्केटबॉल के दीवाने तीन नौजवान– तीनों के देश अलग और साथ ही अलग धर्म भी. ये तीनों तो मिल-जुलकर रह रहे हैं मगर इन्हीं के बड़े-बुज़ुर्ग शायद इतने घुल-मिलकर नहीं रह पा रहे.

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए इन नौजवानों का कहना है कि उनके अपने देशों में चल रहे तनाव या आपसी कड़वाहट का उनके रोज़मर्रा के जीवन पर कोई असर नहीं हुआ है.

मगर लौंग आइलैंड की वेस्टबरी मस्जिद और इस्लामिक केंद्र जाने वाले उम्रदराज़ मुसलमान शायद ऐसा नहीं सोचते.

यहाँ आने वाले अधिकतर उपासक गुजरात से हैं, जहाँ 2002 में हुए धार्मिक दंगों ने पूरे प्रांत को अपनी चपेट में ले लिया था.

इन दंगों में लगभग दो हज़ार लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर मुसलमान थे.

भारत के गुजरात राज्य में हुए उन दंगों का असर आज भी अमरीका तक में महसूस किया जा रहा है.

वेस्टबरी इस्लामिक केंद्र के उपाध्यक्ष का कहना है कि यहाँ के स्थानीय हिंदू और मुसलमानों में फ़ासले बढ़ते जा रहे हैं.

हिचक

इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “मैं हिंदुओं से अक्सर मिलता रहता हूँ लेकिन आजकल ज़्यादा मुसलमान ऐसा नहीं करते. दोनो ओर लोगों में एक तरह की हिचक है.”

अमरीकी मुसलमान
मुसलमानों को शिकायत है कि उनकी बात सुनी नहीं जा रही है

यहाँ ‘हिंदुत्त्व’ के सिर उठाने पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है क्योंकि अलग-अलग लोगों के लिए इस शब्द का मतलब भी अलग-अलग ही है.

जो संस्थाएँ हिंदुत्व के पक्ष में हैं उनका मानना है कि वे केवल भारत को उसकी असली पहचान देना चाहती हैं, जिसमें हिंदू संस्कृति और भावों की प्रमुख मान्यता हो.

मगर भारत के कई धार्मिक समूहों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ, तो उनके अधिकारों का हनन हो सकता है.

अमरीका में रह रहे भारतीयों के बीच आजकल इसी को लेकर बहस हो रही है.

अमरीका में भारतीय

अमरीका में भारतीय मूल के लगभग बीस लाख लोग रहते हैं जिन्हें अक्सर मेहनती, कानून का पालन करने वाला और सफल माना जाता है.

न्यूजर्सी में एडिसन के बीचो-बीच बने हिंदू मंदिर में इसका उदाहरण भी देखा जा सकता है. वहाँ जाने वाले अधिकतर उपासक अमरीका में अपने जीवन से ख़ुश हैं.

ऐसे ही इक्कीस वर्षीय संजय पटेल का कहना है, “अमरीकी और भारतीय दोनों होना एक अनोखा और अच्छा मिश्रण है.”

उनके मित्रों का भी यही मानना है और वे तो ये सोचते हैं कि गुजरात के दंगों ने वहाँ के हिंदुओं और मुसलमानों को और क़रीब ला दिया है.

अमरीका के भारतीय समुदाय में एक संगठन का वर्चस्व बढ़ रहा है और वह है विश्व हिंदू परिषद. इस संगठन का कहना है कि वे दुनिया-भर के हिंदुओं में सांस्कृतिक एकता लाने में जुटे हुए हैं.

कट्टरपंथ को बढ़ावा?

मगर विरोधियों का कहना है कि यह संस्था हिंदू कट्टरपंथियों को बढ़ावा देती है. वैसे विश्व हिंदू परिषद ने इन सभी आरोपों को नकारा है.

विश्व हिंदू परिषद का अमरीका का मुख्यालय एडिसन के मंदिर के पास है.

गुजरात दंगे
गुजरात दंगों में दो हज़ार लोगों के मारे जाने की आशंका

परिषद के राष्ट्रीय सचिव गौरांग वैष्णव का कहना है कि 11 सितंबर को हुए अल-क़ायदा के हमले के बाद, अमरीका में रह रहे हिंदू अब ज़्यादा करीब आ गए हैं.

वह कहते हैं, “एक आम अमरीकी के लिए चाहे कोई व्यक्ति हिंदू हो या मुसलमान इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता इसीलिए यह आवश्यक है कि हम आवाज़ मिलाकर कहें कि हम हिंदू हैं और विश्व शांति में विश्वास रखते हैं. ”

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रही भारत सरकार ने देश के बाहर रह रहे देशवासियों में मेल-जोल बढ़ाने के लिए एक विशेष राजदूत नियुक्त किया है.

इस नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोगों में अपना राजनीतिक प्रभाव मज़बूत करने की इच्छा बढ़ती जा रही है.

अब इस बात पर चिंता व्यक्त की जा रही है कि अमरीका में कट्टर हिंदूवादी समूहों का गुट मज़बूत होता जा रहा है.

कुछ भारतीय मुसलमानों और वामपंथियों ने ये आरोप भी लगाए हैं कि जो आर्थिक सहायता अमरीकी भारतियों की ओर से देश में कल्याणकारी योजनाओं के लिए भेजी गई थी वो ऐसी संस्थाओं के हाथों में जा पड़ी है जो धार्मिक आधार पर बैर और हिंसा को उकसाते हैं.

पूरी तस्वीर कुछ मिली-जुली सी है.

हिंदुओं को जहाँ ये लग रहा है कि वे देश के निर्माण में कुछ योगदान दे पा रहे हैं वहीं मुसलमान समूहों को लग रहा है कि उनकी बात तो सुनी ही नहीं जा रही है.

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