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अफ़ग़ान टीवी पर फिर महिला गायिका
अफ़ग़ानिस्तान में सरकारी टेलीविज़न पर एक बार फिर एक महिला गायिका को दिखाया गया है. ये प्रसारण सुप्रीम कोर्ट की इच्छा के विपरीत हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे प्रसारण को ग़ैर इस्लामी बताते हुए इसपर रोक लगाए जाने की माँग की थी.
अफ़ग़ानिस्तान में ये विवाद इस सप्ताह के आरंभ में शुरू हुआ जब काबुल टेलीविज़न पर 12 साल के बाद किसी महिला गायिका का कार्यक्रम दिखाया गया. अफ़ग़ानिस्तान में 1992 में सोवियत संघ के समर्थन वाली सत्ता के पतन के बाद से वहाँ टेलीविज़न पर अब तक किसी महिला को गाना गाते नहीं दिखाया गया था. मगर इस सप्ताह सोमवार को वहाँ पहली बार अफ़ग़ानिस्तान की लोकप्रिय गायिका सलमा का कार्यक्रम प्रसारित किया गया. समर्थन और विरोध अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के मामलों की मंत्री हबीबा सुराबी ने महिलाओं के कार्यक्रम का समर्थन करते हुए कहा है कि देश में महिलाओं को पुरूषों के ही समान अधिकार मिले हुए हैं. उन्होंने कहा,"मुझे तो सलमा के कार्यक्रम में कुछ भी ग़ैर इस्लामी नहीं दिखा. वे तो विनम्रता से बैठकर गा रही थीं". सुराबी ने दावा किया कि देश की जनता महिलाओं के गाने के प्रसारण के पक्ष में है. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी प्रसारणों पर सरकार के नियंत्रण का समर्थन किया है. मगर देश की सुप्रीम कोर्ट के उप मुख्य न्यायाधीश फज़ल अहमद मनावी का कहना है कि अदालत औरतों के गाने और नाचने की विरोधी है और इसपर रोक लगनी चाहिए. |
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