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मुशर्रफ़ को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी होगी
पाकिस्तान के राष्ट्रपति को अब सरकार बर्ख़ास्त करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति लेनी होगी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने 17वें संविधान संशोधन विधेयक को मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद अब ये विधेयक संविधान का हिस्सा बना गया है. पाकिस्तानी संसद के दोनों सदनों ने इस विधेयक को पहले ही पारित कर दिया था. सोमवार को नेशनल एसेंबली ने इसे मंज़ूरी दी जिसके बाद मंगलवार को सीनेट ने भी इसे पारित कर दिया. साफ़ रास्ता
पिछले दिनों इस संशोधन के पास होने का रास्ता उस समय साफ हो गया था जब राष्ट्रपति ने अगले साल दिसंबर में सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने की घोषणा कर दी थी. मुशर्रफ़ ने यह घोषणा पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामी पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिसे अमल यानी एमएमए के साथ हुए एक समझौते के बाद की. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पहले ही कुछ विशेष अधिकार छोड़ने के लिए भी राज़ी हो गए हैं जो उन्हें संविधान में कुछ संशोधनों के बाद मिले थे. विपक्षी दल लंबे समय से यह माँग कर रहे थे कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ एक पद पर ही बने रहें. इस समय परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष दोनों का पद संभाल रहे हैं. सीनेट में प्रस्ताव के पक्ष में 100 में से 72 मत पड़े. नेशनल एसेंबली में संशोधन विधेयक के पक्ष में 342 में से 248 वोट मिले थे. मतदान विपक्षी दलों के गठबंधन 'एलायंस फ़ॉर रेस्टोरेशन ऑफ़ डेमोक्रेसी' यानी एआरडी ने नेशनल एसेंबली में मतदान के दौरान सदन का बहिष्कार किया था. लेकिन एमएमए के समर्थन के कारण विधेयक पारित होने में कोई परेशानी नहीं हुई. माना जा रहा है कि एआरडी के विरोध की मुख्य वजह संशोधन विधेयक है जिसके कुछ प्रावधानों से गठबंधन सहमत नहीं. एआरडी का कहना है कि उसे संविधान का उल्लंघन एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त नहीं और इसी कारण वे इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. |
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