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सुप्रीम कोर्ट ने पोटा को सही ठहराया
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में आतंकवाद-निरोधक क़ानून या पोटा की सांविधानिक और क़ानूनी वैधता को सही ठहराया है. अदालत ने इसे चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को रद्द कर दिया. कई मानवाधिकार संगठनों और व्यक्तियों ने इन याचिकाओं में पोटा को यह कह कर चुनौती दी थी कि यह लोगों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने विशेष तौर पर संविधान के अनुच्छेद 19 का ज़िक्र किया था जो अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता सुनिश्चित कराता है.
अदालत ने ये याचिकाएँ रद्द कीं लेकिन पोटा क़ानून के कुछ प्रावधानों पर स्पष्टीकरण भी दिया. अदालत की खंडपीठ के दो न्यायधीशों का कहना था कि किसी संगठन को तभी आतंकवादी क़रार दिया जा सकता है यदि उसका नुक़सान पहुँचाने का इरादा साबित हो जाए. पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस फ़ैसले से न सिर्फ़ इस क़ानून के तहत पकड़े जाने वालों को ज़मानत मिलने में आसानी हो जाएगी बल्कि सरकार के लिए किसी भी संगठन को आतंकवादी क़रार देना मुश्किल हो जाएगा. |
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