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पोटा की समीक्षा समिति को और अधिकार
आतंकवाद निरोधक कानून 'पोटा' के दुरुपयोग को लेकर आलोचनाओं का शिकार भारत सरकार ने इस कानून का समीक्षा करने वाली समिति को और अधिकार देने का फ़ैसला किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस बारे में फ़ैसला हुआ जिससे क़ानूनी स्तर पर जल्दी ही इन मामलों का निपटारा किया जा सके. केंद्रीय समीक्षा समिति का गठन इसी साल चार अप्रैल को किया गया था. सरकार ने जब पोटा को पारित करवाया था तब विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया था और कहा थी कि इसका दुरुपयोग होने की आशंका है. यहाँ तक कि सरकार को इसे पारित करवाने के लिए संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र बुलाना पड़ा था. बाद में सरकार ने ख़ुद ही इसकी समीक्षा करने की घोषणा करनी पड़ी. अधिकार संसदीय कार्यमंत्री सुषमा स्वराज ने मंत्रिमंडल में हुए फ़ैसलों की जानकारी देते हुए बताया, "समीक्षा समिति को समीक्षा करने का अधिकार होगा." उन्होंने बताया, "समीक्षा समिति की सलाह केंद्र, राज्य और जाँच अधिकारी को अनिवार्य रूप से माननी होगी." स्वराज के अनुसार इस मामले में राष्ट्रपति शुरुआती तौर पर एक अध्यादेश जारी करेंगे और शीतकालीन सत्र में उसे विधेयक का रूप दे दिया जाएगा. तीन सदस्यीय समीक्षा समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अरुण सहारया कर रहे हैं. संसदीय कार्यमंत्री के अनुसार राज्य चाहें तो अपने स्तर पर ऐसी समितियों का गठन कर सकते हैं मगर यदि राज्य और केंद्र दोनों ही समीक्षा समितियों के सामने कोई शिकायत आई तो केंद्रीय समिति का फ़ैसला सर्वमान्य होगा. सरकार के अनुसार ये क़दम पोटा से जुड़ी परेशानियों के समाधान में महत्त्वपूर्ण होगा. स्वराज ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने इस कानून का दुरुपयोग रोकने की भरसक कोशिश की थी मगर फिर भी कुछ शिकायतें आई हैं और उसे देखते हुए ही सरकार ये क़दम उठा रही है. |
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