|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक थी अयोध्या
बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के राजनीतिक रंग पकड़े जाने के बाद एक आम राय सी हो गई है कि शायद अयोध्या और उसके आसपास सिर्फ़ हिंदू ही रहते है. यानी ये सिर्फ़ हिंदुओं की नगरी है लेकिन हक़ीकत बिल्कुल अलग है. अयोध्या-फ़ैजाबाद में मुसलमान भी बड़ी संख्या में रहते हैं. सिर्फ़ अयोध्या में ही लगभग 85 मस्जिदें मौजूद हैं और अधिकतर में अब भी नमाज़ अदा की जाती है. साथ ही बहुत सी जगहों पर मंदिर और मस्जिद साथ- साथ हैं. अयोध्या में ऐतिहासिक ओरंगज़ेबी मस्जिद है और उसके ठीक पीछे सीता राम निवास कुंज मंदिर भी है. दोनों के बीच केवल एक दीवार है. आलमगीरी मस्जिद के इमाम अब्दुल रऊफ़ का कहना है कि ये मस्जिद मुगल काल में बनी थी और इसके अलावा मस्जिद के पास एक दरगाह भी है.
सीता राम मंदिर के पुजारी सत्येंद्र कुमार शास्त्री कहते हैं," हम अपने धर्म की परंपरा का निर्वाह करते हैं और मुसलमान अपनी इबादत करते हैं और दोनों में कोई द्वेष नहीं है." इसी तरह हिंदुओं और मुसलमानों की भाईचारे का सबूत है साबिर अली और उनका परिवार. साबिर अली बताते हैं कि सुंदर भवन मंदिर का निर्माण उनके पिता अनवर हुसैन की देखरेख में हुआ था. यहाँ तक कि बाद में उन्हें मंदिर का प्रबंधक नियुक्त कर दिया गया और उन्होंने ये ज़िम्मेदारी 1990 में अपनी मृत्यु तक निभाई. साबिर अली कहते हैं कि उन्हें अच्छी तरह याद है कि कभी-कभी शाम के समय मंदिर के पुजारी वहाँ नहीं होते थे तो उनके पिता ख़ुद आरती करते थे और इस पर किसी हिंदू ने कभी कोई एतराज़ नहीं किया. अयोध्या की हुनमान गढ़ी, आचार्यजी का मंदिर और उदासीन आश्रम के लिए तत्कालीन मुसलमान शासकों ने ज़मीन दी थी. हनुमान गढ़ी के कर्ताधर्ता ज्ञान दास कहते हैं," गढ़ी के निर्माण के लिए ज़मीन अवध के नवाब ने दी थी. शायद इसी कारण आज भी रोज़ाना एक मुसलमान फकीर को गढ़ी की ओर से कच्चा खाना दिया जाता है." शायद इन्हीं बातों के कारण अयोध्या को हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक माना जाता था. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||