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'पाकिस्तान में पत्रकारों पर हमले बढ़े'
अमरीका की एक मानवाधिकार संस्था का कहना है कि पाकिस्तान में पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा बढ़ रही है. न्यूयॉर्क स्थित 'ह्यूमन राइट्स वॉच' का कहना है कि चार साल पहले जब परवेज़ मुशर्रफ़ ने सत्ता सँभाली तब से लेकर अब तक प्रेस की स्वतंत्रता ख़त्म ही हो रही है. राष्ट्रपति को लिखे एक खुले पत्र में संगठन का कहना है कि पत्रकारों को सुनियोजित तरीक़े से धमकाया जा रहा है, उन पर अत्याचार हो रहे हैं और उन्हें बिना किसी आरोप के ही बंदी बनाया जा रहा है. इसमें दो पत्रकारों का मामला उठाया गया है जिन्हें कथित रूप से धमकाया गया और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन पर अत्याचार भी किए. इस संगठन के बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी अख़बारों के संपादकों के पिछले महीने हुए एक कार्यक्रम में मासिक पत्रिका 'हेराल्ड' के वरिष्ठ सहायक संपादक आमिर मीर की कथित तौर पर आलोचना की. संगठन का कहना है, "दो दिन बाद कुछ अज्ञात लोगों ने आमिर मीर के घर के ही बाहर उनकी कार जला दी." इसके बाद मीर को एक पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि ये तो केवल शुरुआत भर है. संगठन ने रशीद आज़म का मामला भी सामने रखा है. आज़म बलूचिस्तान प्रांत के एक पत्रकार हैं जिन्हें राजद्रोह के आरोप में वर्ष 2002 में गिरफ़्तार कर लिया गया था. संगठन का कहना है कि उसकी जानकारी के मुताबिक़ सेना ने आज़म को जितने दिन हिरासत में रखा उतने दिन उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें प्रताड़ित भी किया. संगठन के एशिया डिवीज़न के कार्यकारी निदेशक ब्रैड एडम्स का कहना है, "जनरल मुशर्रफ़ को आमिर मीर की कार पर हुए हमले की जाँच के आदेश देने चाहिए और हेराल्ड को लेकर दिए बयान से ख़ुद को सार्वजनिक रूप से अलग करना चाहिए." एडम्स के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति को दिखा देना चाहिए कि वह पुराने सैनिक शासकों जैसे नहीं हैं और एक सुधारक हैं. |
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