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श्रीलंका की संसद में निलंबन पर हंगामा
श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के दो सप्ताह पहले संसद को निलंबित करने के बाद बुधवार को संसद की बैठक हुई और उसमें जमकर हंगामा हुआ. बाद में राष्ट्रपति ने अपना आदेश वापस ले लिया था. श्रीलंका की संसद के स्पीकर ने कहा कि संसद को निलंबित करना सत्ता का दुरुपयोग था. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संसद के सत्र में बाधा डालने के भविष्य में किसी प्रयास को अस्वीकार कर दिया जाएगा. स्पीकर जोसेफ़ माइकल परेरा ने कहा," यदि ऐसा फिर होता है ( संसद का निलंबन) तो संसद को ये अधिकार होना चाहिए वो अपने आप सत्र बुला सके." स्पीकर की टिप्पणी पर राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा की विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने हंगामा किया. उन्होंने अपनी मेजों पर कागज़ों को पटका और विरोध में भारी शोरगुल किया. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि स्पीकर की टिप्पणी से स्पष्ट है कि श्रीलंका में कितना बड़ा सांविधानिक संकट आ खड़ा हुआ है.
दो हफ़्ते पहले राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने संसद निलंबित कर दी थी जिसके बाद देश में राजनीतिक संकट शुरू हो गया था. संकट की मूल वजह श्रीलंका में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच तमिल विद्रोहियों के साथ शांति प्रक्रिया को लेकर मतभेद थे. दोनों नेताओं ने मंगलवार को आपस में दूसरी बार बैठक कर ये तय किया कि आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा. एक पखवाड़े पहले राष्ट्रपति के अचानक लिए गए कुछ फ़ैसलों से बजट पेश करने का काम टल गया था. चुनाव श्रीलंका में इस संकट के उठ खड़े होने के बाद से ही नए चुनाव कराए जाने की चर्चा चल रही है. हालांकि दोनों पक्षों के नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से वादा किया कि उनका संसद को भंग करने और नए चुनाव करवाने का कोई इरादा नहीं है. वैसे प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के प्रवक्ता जी एल पेइरिस ने कहा,"चुनाव में काफ़ी खर्च होते हैं मगर यदि ये हम पर थोपा गया तो हम इसका सामना करेंगे." श्रीलंका में अगर चुनाव होते हैं तो पिछले चार साल में वहाँ यह तीसरा चुनाव होगा. |
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