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पाकिस्तान ने शुरू किया एड्स अभियान
पाकिस्तान ने एड्स से निबटने का एक व्यापक अभियान शुरू किया है जबकि अब तक वह इस बात से इनकार करता रहा है कि वहाँ यह समस्या मौजूद है. वैसे भारत के मुक़ाबले पाकिस्तान में एड्स और एचआईवी संक्रमण के मामले बहुत कम हैं. अभी तक कई सरकारी और धार्मिक नेताओं का तर्क रहा है कि इसका कारण मुसलमानों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नैतिक मूल्यों को अहमियत देना रहा है. लेकिन अब वे इन तथ्यों को स्वीकार करने को बाध्य हैं कि यदि समय रहते सावधान नहीं बरती गई तो अन्य इस्लामी देशों की तरह पाकिस्तान में भी यह समस्या हद से ज़्यादा बढ़ सकती है. नवीनतम आँकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में सत्तर से अस्सी हज़ार लोग तक एचआईवी से प्रभावित हैं और उनमें से दो हज़ार से कुछ ज़्यादा एड्स संक्रमित हैं. आँकड़े विवादास्पद लेकिन ग़ैर-सरकारी संस्था अमाल के इमरान रियाज़ का कहना है कि संख्या इससे कहीं ज़्यादा है.
वह कहते हैं, "ये आँकड़े विवादास्पद हैं. हम निगरानी या सर्वेक्षण के मामले में बहुत पीछे हैं". "ये आँकड़े इसलिए भी विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि बहुत से लोग सामाजिक बहिष्कार के डर से सामने नहीं आते हैं". देखा जाए तो पाकिस्तान में परिस्थितियाँ भारत से बहुत अलग नहीं हैं जहाँ लगभग चालीस लाख लोग एचआईवी से प्रभावित हैं. पाकिस्तान के प्रभावशाली धार्मिक हलक़ों में अब भी यह मान्यता है कि एड्स उन्हीं लोगों को होता है जो मज़हब के रास्ते से भटक जाते हैं. इस्लामाबाद के इस्लामी विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर मोहम्मद जुनैद कहते हैं कि इस्लाम में कुछ ऐसे नैतिक मूल्य निहित हैं जो लोगों को ग़लत कामों से रोकते हैं. लेकिन ऐसी अवधारणाएँ अब बदल रही हैं. यूनिसेफ़ की अधिकारी केटी ग्रुसाविन के मुताबिक पाकिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं के कमज़ोर ढाँचे और सामाजिक बंधनों को देखते हुए उसे अगले पाँच साल में इस बारे मे क़दम उठा लेने चाहिए वर्ना बहुत मुश्किल हो जाएगी. |
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