|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वाजपेयी हिम्मत वाले नेता हैं:शेख़ रशीद
पाकिस्तान के सूचनामंत्री शेख़ रशीद अहमद ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अकेले ऐसे नेता हैं जो दोनों देशों के बीच कटुता को ख़त्म कर सकते हैं. दक्षिण एशियाई देशों के क्षेत्रीय संगठन सार्क के सूचना मंत्रियों के सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुँचे शेख रशीद ने वाजपेयी से मुलाक़ात भी की. लेकिन तीन देशों की यात्रा पर निलकने से पहले प्रधानमंत्री वाजपेयी ने हवाई अड्डे पर बताया कि पाकिस्तानी नेता से मुलाक़ात में कोई बातचीत नहीं हुई.
उन्होंने हल्के-फ़ुल्के अंदाज़ में कहा,"सिर्फ़ हस्तांदोलन हुआ है...बस हाथ मिलाया है". वाजपेयी ने ये भी कहा कि उनकी अगले साल सार्क की शिखर बैठक के लिए वाजपेयी के इस्लामाबाद जाने के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई. इससे पहले पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने कहा था कि वे इस बारे में प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रूल्ला ख़ान जमाली का संदेश भारत के प्रधानमंत्री को देना चाहते हैं. वाजपेयी अकेले नेता
सम्मेलन की सचिव स्तरीय बैठक सोमवार को हो चुकी है और मंत्री स्तर की बैठक मंगलवार को हो रही है. शेख़ रशीद अहमद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है, "प्रधानमंत्री वाजपेयी अकेले ऐसे नेता हैं जो दोनों देशों के बीच अनसुलझे मुद्दे सुलझाने के लिए हिम्मत वाले क़दम उठा सकते हैं." "उनके अलावा ऐसा कोई और नेता नहीं नज़र आता, सिर्फ़ अँधेरा ही अँधेरा है". उन्होंने कहा कि वाजपेयी एक बड़े अनुभव वाले नेता हैं और उनके राजनीतिक अनुभव के सामने कोई और नेता खड़ा नहीं हो सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान के साथ अदावत को ख़त्म करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साहसिक क़दम उठा पाएंगे. इस बारे में विस्तार से बताने के अनुरोध पर शेख़ रशीद अहमद ने कहा, "समझदार के लिए इशारा ही काफ़ी है." भारत दौरा शेख़ रशीद अहमद दुबई से होते हुए भारत पहुँचे क्योंकि दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क बंद है. उन्होंने पत्रकारों को बताया,"मैं राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रुल्ला ख़ान जमाली का पैग़ाम वाजपेयी जी के लिए लाया हूँ और उसे उन तक पहुँचाने के लिए मुझे चंद मिनट की ज़रूरत होगी." उल्लेखनीय है कि शेख़ रशीद अहमद भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने के बारे में भारत की हाल की पहल का विरोध कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि इस तरह के क़दमों से कुछ नहीं होने वाला जब तक मुख्य मुद्दा कश्मीर का हल नहीं किया जाता. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा था कि नीयत ठीक हो तो बाक़ी मामलों को भी हल किया जा सकता है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||