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सोमवार, 13 अक्तूबर, 2003 को 15:53 GMT तक के समाचार
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पहली गठबंधन सरकार जो चार साल चली
वाजपेयी और आडवाणी
वाजपेयी और आडवाणी ही इस सरकार के दो प्रमुख स्तंभ के रूप में रहे हैं

भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने चार साल पूरे कर लिए हैं.

केंद्र में लगातार चार साल चलने वाली यह पहली गठबंधन सरकार है.

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के चार साल पूरे करने को भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी उपलब्धि करार दिया है.

मगर विश्लेषक इस राय से पूरी तरह सहमत नहीं दिखते.

पार्टी के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने इस मौके पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "इस सरकार से पहले कोई गठबंधन सरकार इतनी लंबी नहीं चली."

नायडू का कहना था, "केवल स्थिरता ही नहीं बल्कि अच्छा प्रशासन, एकता और विषयों पर अस्पष्टता जैसी कुछ अच्छी उपलब्धियाँ भी रही हैं."

पार्टी अध्यक्ष का कहना था कि वाजपेयी सरकार के चार साल के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुँचाई जाएगी.

उनका कहना था कि इस सरकार ने अर्थव्यवस्था को कमी से बढ़ोत्तरी की ओर बढ़ाया है.

नायडू के अनुसार सरकार के अनाज के भंडार भरे हुए हैं, वित्तीय स्थिति सुधरी है और विदेशी मुद्रा का भंडार भी बढ़ा है.

आकलन

विश्लेषकों का इस बारे में कहना है कि अयोध्या मसले से लेकर गुजरात में हुए भीषण दंगे सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफ़ी हैं.

'हिंदू' अख़बार के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख हरीश खरे का इस बारे में कहना था कि सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना ही रहा.

बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया जारी रखकर सरकार ने मध्यम वर्ग को ख़ुश करने की कोशिश की है.

खरे के अनुसार सरकार ने निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के अपने मतदाताओं को इस मामले में ख़ासतौर पर ध्यान में रखा है.

मगर उनका स्पष्ट कहना था कि ये सरकार बँटी हुई है और इसका नेतृत्त्व भी बँटा हुआ है.

खरे के अनुसार इसी वजह से ये सरकार आर्थिक सुधारों को छोड़कर किसी भी और क्षेत्र में कोई ख़ास प्रगति नहीं कर सकी.

उनका कहना था, "सरकार न तो आतंकवाद पर रोक लगा पाई और न ही सांप्रदायिक सौहार्द ही बनाए रख पाई."

भारत की विदेश नीति को भी उन्होंने अमरीका की ओर झुका हुआ मानते हुए कहा कि सरकार इसके ज़रिए पाकिस्तान के विरुद्ध अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश में थी.

वैसे उन्होंने ये ज़रूर कहा कि इराक़ मसले पर सरकार ने अमरीका के विरुद्ध थोड़ी हिम्मत दिखाई है.

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