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नौकरानियों पर अत्याचार के मामले में नज़रबंदी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में भारतीय मूल के एक दंपत्ति को दो घरेलू नौकरानियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने के आरोप में उन्हें उनके घर में ही नज़रबंद करने का आदेश दिया गया है. न्यूयॉर्क में एक अदालत ने भारतीय मूल के एक अमरीकी दंपत्ति को अपने घर में दो महिलाओं को बंदी बनाकर रखने के मामले में ज़मानत तो दे दी है लेकिन उन्हें उनके ही घर में नज़रबंद करने का हुक्म दिया गया है. परफ़्यूम का कारोबार करने वाले करोड़पति व्यापारी महेंद्र मुरलीधर सभनानी और उनकी पत्नी वर्षा सभनानी को दो हफ़्ते पहले गिरफ़तार किया गया था और उन पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने लॉन्ग आइलैंड स्थित अपने घर में इंडोनेशियाई मूल की दो महिलाओं को कई सालों से गुलामों की तरह रखा और उन्हें प्रताड़ित किया. न्यूयॉर्क में सरकारी वकील डिमीट्री जोन्स ने इस मामले के बारे में कहा कि, “यह तो साफ़ तौर पर आधुनिक युग की दास प्रथा का मामला है.” सभनानी दंपत्ति पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने घरेलू कामकाज के लिए रखी गई इन औरतों के साथ अमानवीय व्यहवार किया. पुलिस के मुताबिक़ इन महिलाओं को मारा-पीटा जाता रहा और एक औरत को बार-बार ठंडे पानी से नहाने पर मजबूर किया गया तो दूसरी को बहुत-सी मिर्ची खाने पर. इसके अलावा इन दोनों को इनकी तन्खाव्ह भी नहीं दी जाती थी. इन महिलाओं को घर से बाहर निकलने की भी इजाज़त नहीं थी. राज़ खुला यह मामला उस समय सामने आया जब इनमें से एक महिला कूड़ा फेंकने के बहाने भाग निकली और फटे कपड़ों में घूमती हुई दिखी. चूंकि ये महिलाएँ अँगरेज़ी नहीं बोल पाती हैं इसलिए यह किसी को अपना हाल भी नहीं बता पा रही थीं लेकिन पास के रेस्तराँ के एक कर्मचारी ने कुछ गड़बड़ी भाँपी और इस महिला के बारे में पुलिस को सूचना दे दी. आम लोगों में इस घटना को लेकर चिंता है और वह न्याय की माँग कर रहे हैं. एक अमरीकी महिला फ़्रांसेस्का को इस बात पर हैरत है कि इतने सालों तक यह मामला दबा कैसे रहा. उन्होंने कहा, “मुझे हैरत इस बात पर है कि इतने लंबे अर्से से इन महिलाओं को बंद रखा गया और किसी को पता तक नहीं चला. यह पैसे वाले लोग हैं इनके घर में पार्टियां होती रही होंगी, मेहमान आते रहे होंगे क्या किसी ने कुछ नहीं देखा. मुझे उन दोनों महिलाओं पर बहुत तरस आ रहा है, उन्हें न्याय मिलना चाहिए. और सभनानी दंपत्ति पैसे वाले होने के कारण कानून के शिकंजे से निकलने न पाएँ.” नोना और समीरा नाम की यह महिलाएं अमरीका में सन 2002 में पर्यटक वीज़ा पर आई थीं और यहीं रूक गई. उसी साल सभनानी दंपत्ति ने उन्हें अपने घर में घरेलू कामकाज के लिए रख लिया और उनके पासपोर्ट भी छीन लिए. इन महिलाओं का कहना है कि उन्हे भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था औऱ उन्हे ज़मीन पर सोना पड़ता था. पुलिस ने सभनानी दंपत्ति पर ग़ुलामी कराने और अवैध विदेशियों को पनाह देने का मामला दर्ज किया है. इन दोनों को पैंतीस लाख डॉलर की ज़मानत पर छोड़ा गया है. अदालत में सभनानी दंपत्ति के वकीलों ने सारे इल्ज़ामों को ग़लत बताया है. चिंताजनक स्थिति अब इस मामले के सामने आने से घरेलू कामकाज करने वालों के बारे में बहस छिड़ गई है. कुछ लोग यह भी सोचने पर मजबूर हैं कि ऐसे कितने और मामले हैं जो सामने नहीं आए हैं.
इस ताज़ा मामले में अदालत ने इस दंपत्ति को यह कहकर ज़मानत तो दे दी है कि समाज को इनसे कोई बड़ा खतरा नहीं है लेकिन इनके देश छोड़कर भाग जाने के अंदेशे के तहत इन दोनों को इनके ही घर में सख्त पांबंदियों के साथ कैद रखा जाएगा. इन दोंनो पर चौबीस घंटे नज़र रखी जाएगी, इनके फ़ोन की टैपिंग होगी और इनके इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिए जाएंगे. इनके बच्चे इनके लिए खाना वगैराह भी बाहर से नहीं ला सकेंगे. इन्हे खुद रेस्तरां से खाना मंगाना पड़ेगा. और इन सारी पाबंदियों को लागू करने का जो खर्चा आएगा वह भी इन्हें खुद उठाना पड़ेगा. सभनानी दंपत्ति न्यूयॉर्क के करोड़पतियों में गिने जाते हैं. न्यूयॉर्क के साथ-साथ इनका विश्व के कई देशों में परफ़्यूम का बिज़नेस फैला हुआ है. अगर इन दोनों पर लगाए गए आरोप साबित हो जाते हैं तो इन्हें बीस साल की क़ैद की सज़ा हो सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें सूडान में अब भी ग़ुलामी?29 मई, 2003 | पहला पन्ना नए ज़माने में भी ग़ुलामी का जीवन26 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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