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शुक्रवार, 29 दिसंबर, 2006 को 14:50 GMT तक के समाचार
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भुट्टो ने कोहिनूर हीरा वापस माँगा था
वर्ष 2002 में राजमाता के ताबूत पर रखा उनका मुकुट
शाही मुकुट में जड़ा है कोहिनूर
कोहिनूर हीरे पर भारत अपना दावा जताता रहा है लेकिन कम लोग जानते हैं कि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इसकी माँग ब्रिटेन सरकार के सामने रखी थी.

1970 के दशक में पाकिस्तान की ओर से उठाई गई माँग के बाद ब्रितानी सरकार ने ये पता लगाने की कोशिश ज़रुर की थी कि इस बेशक़ीमती हीरे पर ब्रिटेन का मालिकाना हक जायज़ है या नहीं.

ब्रिटेन के राष्ट्रीय अभिलेखागार से जारी दस्तावेज़ों से पता चलता है कि पाकिस्तान की माँग को वर्ष 1976 की तत्कालीन ब्रितानी सरकार ने गंभीरता से लिया था.

सरकारी अधिकारियों के एक दल से इस बात को पक्का करने को कहा गया था कि 105 कैरेट के कोहिनूर हीरे पर ब्रिटेन का मालिकाना हक सही है.

हालाँकि एक अधिकारी ने कहा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोहिनूर ब्रिटेन में कानूनन है या नहीं.

अभिलेखागार के मुताबिक तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जु़ल्फि़कार अली भुट्टो ने ब्रितानी प्रधानमंत्री जिम कैलेहन को पत्र लिखकर कोहिनूर को लौटाने की विनम्र माँग की थी.

भुट्टो ने कहा था कि ब्रितानी राज के दौरान लाए गए कीमती सामानों पर ब्रिटेन के कब्जा बनाए रखने की वजह से पाकिस्तानी जनता अपनी “सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से वंचित” है.

जिम कैलैहन
कैलेहन ने कोहिनूर के मालिकाना हक़ की जाँच करवाई थी

भुट्टो ने कहा “एक ऐसी ही वस्तु है जिसका महान ऐतिहासिक महत्व है वह है कोहिनूर हीरा जिसे वर्ष 1849 में लाहौर से लंदन ले जाया गया था.”

उन्होंने कहा था, “मौजूदा हालात में ब्रिटेन के लिए वित्तीय रुप से इस हीरे की कोई खास महत्ता नहीं है लेकिन इसके लंबे इतिहास की वजह से पाकिस्तान के लिए इसका भावनात्मक महत्व बढ़ जाता है.”

भुट्टो का तर्क था कि कोहिनूर की पाकिस्तान वापसी ब्रिटेन के साम्राज्यवादी बाधाओं और उपनिवेशन को खत्म करने के फैसले का शानदार प्रदर्शन होगा.

लेकिन पाकिस्तान की इस माँग में दो समस्याएं थीं.

जटिल इतिहास

पहली बात तो यह कि कोहिनूर पर हक जताने वाला पाकिस्तान अकेला देश नहीं था.

पिछले पाँच सौ वर्षों के दौरान यह शानदार हीरा भारत से ईरान गया और फिर अफ़गानिस्तान होता हुआ वापस भारत में लाहौर के ख़जाने में शामिल हो गया.

हमारा या तुम्हारा
 इस समय सच यह है कि कोहिनूर हमारे पास है, अब चाहे उस पर हमारा कब्ज़ा कानूनन सही हो या नहीं
विदेश मंत्रालय के अधिकारी

ब्रितानियों ने भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करते समय एक शाँति समझौते के तहत इस हीरे को अपने कब़्जे में लिया और लंदन भेज दिया.

और दूसरी समस्या? हीरे को शाही मुकुट के आभूषणों में लगा दिया गया था जहाँ वह आज भी मौजूद है.

रानी विक्टोरिया के राज के समय जब कोहिनूर ब्रिटेन आया तो उसे फिर से तराशा गया और उसका आकार छोटा करके उसे और भी ज़्यादा चमकदार बनाया गया.

तत्कालीन ब्रितानी प्रधानमंत्री जिम कैलेहन ने रानी के साथ सलाह मशविरा किया.

हालाँकि रानी के जवाब के बारे में कुछ पता नहीं चल सका क्योंकि उनके निजी सचिव मार्टिन चार्टरिस का प्रधानमंत्री को भेजा नोट अब तक गुप्त ही है.

लेकिन ब्रितानी प्रधानमंत्री ने भुट्टो को एक विनम्र ‘ नहीं’ के रुप में जवाब दिया.

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