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सोमवार, 18 दिसंबर, 2006 को 20:13 GMT तक के समाचार
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प्रवासियों के लिए अधिक सुरक्षा की अपील
प्रवासी
प्रवासियों को अधिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग उठ रही है.
अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस के अवसर पर प्रवासियों के अंतरराष्ट्रीय संगठन (आईओएम) ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में प्रवासियों के बढ़ती भूमिका को देखते हुए उन्हें अधिक सुरक्षा दी जानी चाहिए.

आईओएम ने संकट के समय प्रवासी कामगारों को सहायता पहुँचाने के लिए एक कोष बनाने की बात भी कही.

आईओएम ने कहा कि लेबनान में इस साल के शुरु में हुए संघर्ष के वक्त लगभग 11 हज़ार प्रवासी कामगारों का किसी ने ध्यान नहीं रखा जबकि पश्चिमी विकसित देशों के लोगों को लेबनान से निकाल लिया गया था.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2005 में क़रीब 19 करोड़ लोग अपना देश छोड़ कर दूसरे देशों में काम करने चले गए. जबकि 1980 में ये संख्या 10 करोड़ के आसपास थी.

पिछले 15 वर्षों में एक देश से दूसरे देश में जाकर काम करने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है.

खाड़ी देशों जैसे कुछ स्थानों में तो ये प्रवासी कामगार अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं.

सुरक्षा की चिंता

आईओएम का कहना है कि जब कभी भी किसी देश में संघर्ष की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं तो वहाँ रह रहे प्रवासी कामगारों पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

आईओएम के महानिदेशक ब्रनसन मैकिनले ने कहा," जिस देश में भी प्रवासी रह रहे हैं वहाँ के आर्थिक और सामाजिक विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनकी सुरक्षा को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए."

 जिस देश में भी प्रवासी रह रहे हैं वहाँ के आर्थिक और सामाजिक विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनकी सुरक्षा को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए.
ब्रनसन मैकिनले, महानिदेशक, आईओएम

आईओएम ने कहा कि ज़ल्द ही एक आपातकालीन कोष बनाया जाना चाहिए जिससे राष्ट्रीय सरकारें, गैर-सरकारी संगठन और आईओएम ख़ुद प्रवासियों को संकट के समय सभी तरह की सहायता पहुँचा सकें.

लेबनान संकट के समय आईओएम ने लगभग 11 हज़ार लोगों को देश से बाहर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया था.

इसमें अधिकतर एशिया और अफ्रीका की महिलाएँ शामिल थीं जो लेबनान निवासियों के घरों में काम करती थीं.

आईओएम ने इराक़ संकट का भी ज़िक्र किया जिसमें प्रवासी कामगार इराक़ छोड़कर जॉर्डन चले गए थे.

आइवरी कोस्ट और लाईबेरिया में हुए संघर्ष में भी प्रवासियों को देश छोड़कर जाने को मजबूर होना पड़ा था.

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