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भारतीय कंपनी ने लॉटो चलाने में रुचि दिखाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में लॉटरी चलाने वाली सबसे बड़ी निजी कंपनी ने ब्रिटेन की नेशनल लाटरी चलाने में दिलचस्पी दिखाई है. नेशनल लाटरी को आम तौर पर लॉटो के नाम से जाना जाता है भारतीय निजी कंपनी सुगल और दमानी ब्रिटेन की नेशनल लाटरी चलाने की उस रेस में शामिल हो गई है जिसमें ये लाटरी चलाने वाली वर्तमान कंपनी केमीलॉट और ऑस्ट्रेलिया की कंपनी टेटरसॉल पहले से शामिल हैं. दस साल का लाएसेंस पाने के लिए असल मुकाबला वर्ष 2009 में शुरु होगा. दिसंबर तक इसके लिए दावा पेश किया जा सकता है और फ़ैसले की घोषणा अगले साल मार्च-अप्रैल तक होने की संभावना है. सुगल और दमानी भारत में लगभग तीस साल से ज़्यादा समय से कुछ लॉटरी चला रही है. ये कंपनी वित्तीय प्रबंधन, हीरों के व्यवसाय और पर्यटन में सक्रिय है. सुगल और दमानी ग्रुप के चेयरमैन सुगलचंद जैन का कहना है कि उनकी कंपनी अपना दावा पेश करने के लिए उसे अंतिम स्वरूप देने की प्रक्रिया में है. ब्रिटेन के नेशनल लॉटरी आयोग की प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि इस भारतीय कंपनी ने लॉटरी चलाने में दिलचस्पी दिखाई है और उनका कहना था कि वे इसका स्वागत करती हैं. वर्ष 1994 में शुरु किए जाने के बाद से नेशनल लॉटरी विजेयताओं को लगभग 26 अरब पाउंड की राशि दे चुकी है जबकि उसने लगभग 18.5 अरब पाउंड विभिन्न सामाजिक उद्देश्यों के लिए एकत्र किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें इटली में लॉटरी का बुखार09 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना अब तक की सबसे बड़ी जीत26 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना पति-पत्नी बने करोड़पति13 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना लॉटरी ने बदली क़िस्मत03 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना भारत की पहली इंटरनेट लॉटरी31 मार्च, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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