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दारफ़ुर को खाद्य सहायता आधी हुई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पैसे की कमी के चलते संयुक्त राष्ट्र सूडान के दारफ़ुर क्षेत्र को दी जाने वाली खाद्य सहायता आधी कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख जेम्स मॉरिस ने कहा कि ये बहुत ही कठिन फ़ैसला था. फ़ैसले पर दुख जताते हुए जेम्म मॉरिस ने कहा, "दारफ़ुर को लोग पहले ही बहुत भुगत चुके हैं, हम खाद्य मदद आधी कर उनके ज़ख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं." जेम्स मॉरिस ने बताया कि विश्व खाद्य कार्यक्रम को ज़रूरत के अनुसार धनराशि नहीं मिली है. मई महीने से दारफ़ुर को दिया जाने वाला राशन न्यूनतम ज़रूरत के स्तर से आधा हो जाएगा. ये कटौती ऐसे समय की गई है जब दारफ़ुर में कुपोषण दर में बढ़ोत्तरी हुई है. सूडान में पिछले तीन साल के संघर्ष के चलते कई लोग बेघर हो गए हैं और दारफ़ुर में करीब तीस लाख लोग पूरी तरह से खाद्य सहायता पर निर्भर हैं. संघर्षविराम और शांतिवार्ता के बावजूद, दारफ़ुर के कई इलाक़ों में विद्रोहियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हो रही हैं. इससे खाद्य सामग्री को लाने में दिक्कत हो रही है. सूडान में 61 लाख लोगों को खाद्य सहायता की ज़रूरत है और इसके लिए 74 करोड़ 60 लाख डॉलर चाहिए होंगे. विश्व खाद्य कार्यक्रम के मुताबिक अमरीका ने 18 करोड़, 80 लाख डॉलर दिए हैं लेकिन यूरोपीय संघ से बहुत कम मदद मिली है. अरब लीग के देशों में से लीबिया के अलावा दूसरे देशों से कोई मदद नहीं मिली है. दारफ़ुर में खाद्य सहायता में कटौती इस प्रकार की जा रही है ताकि जुलाई और सितंबर के बीच लोगों को खाना मिल पाए. इन महीनों के दौरान सबसे ज़्यादा भुखमरी पाई जाती है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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