|
यूक्रेन ने चेरनोबिल हादसे को याद किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना चेरनोबिल हादसे की बीसवीं बरसी पर यूक्रेन में अनेक आयोजन हुए हैं. जिस परमाणु संयंत्र के बाहर हादसा हुआ था उसके बाहर हादसे में बच गए लोगों और उसमें मारे गए लोगों के रिश्तेदारों के साथ राष्ट्रपति विक्टर युशचेंको ने भी हादसे को याद किया. लेकिन पड़ोसी बेलारुस में, जहाँ इस हादसे का बड़ा प्रभाव पड़ा था, राजधानी मिंस्क ने विपक्षी दलों ने एक प्रदर्शन का आयोजन किया है और सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं. ये हादसा यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब 110 कीलोमीटर दूर स्थित चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में हुआ था. जिस समय वर्ष 1986 में चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में ये हादसा हुआ था, मंगलवार रात को ठीक उसी समय यूक्रेन के गिरिजाघरों में घंटियाँ बजाई गईं और फिर एक मिनट का मौन रखा गया. हादसे में मारे गए लोगों की याद में मोमबत्तियाँ भी जलाई गईं. यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर युशचेंको ने भी उस प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया. इस हादसे में मारे गए लोगों की संख्या एक लाख तक बताई जाती है. राष्ट्रपति युशचेंको ने संयंत्र में उन कर्मचारियों का भी सम्मान किया जिन्होंने अपनी जान जोख़िम में डाल कर बचाव कार्य किया. प्रदर्शन बेलारुस की राजधानी मिंस्क के अक्तूबर स्क्वेयर में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच कुछ झड़पें हुई हैं. इसके बाद सुरक्षाबलों ने चौराहे को पूरी तरह घेर लिया. इस प्रदर्शन का नेतृत्व अलेक्ज़ेंडर मिलिंकेविच ने किया. उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में मिलेंकेविच की हार के बाद चुनाव में धांधली के आरोप लगाए गए थे और बड़े प्रदर्शन हुए थे. वैसे मिंस्क में हादसे की बरसी पर हर साल विपक्षी दल विरोध प्रदर्शन करते हैं. कैसे हुआ हादसा
चेरनोबिल परमाणु हादसा सोवियत संघ के विघटन से पहले हुआ था. 26 अप्रैल 1986 की सुबह परमाणु संयंत्र के कुछ कर्मचारी एक प्रयोग कर रहे थे, जब चार नंबर के रिक्टर में ज़बरदस्त धमाका हुआ. धमाके के साथ ही इमारत में आग लग गई और रेडियोधर्मी तत्व तेज़ी से हवा में फैल गए. तत्कालीन सोवियत संघ के अधिकारियों ने पहले तो ये मानने से ही इनकार कर दिया कि कुछ ग़लत हुआ है. लेकिन जब स्वीडन में खतरे की घंटी बजी तब उन्होंने परमाणु संयंत्र के पास रहने वाले लोगों को इलाक़े से हटाना शुरू किया. तब तक हादसे के बाद छत्तीस घंटे बीत चुके थे. दर्घटना की पहली ख़बरें भी सोवियत मीडिया में धमाकों के दो दिन बाद आनी शुरू हुईं थीं. दुर्घटना में तबाही के पैमाने को छिपाने की कोशिश की गई. उस वक्त जल्दी में एक कॉन्क्रीट की छत बनाकर रिएक्टर को ढक दिया गया और चेरनोबिल के आसपास 30 किलोमीटर तक के इलाक़े को सील कर दिया गया. हादसा कितना गंभीर है इसका पता चलने में कई हफ़्ते लग गए. यहाँ तक की बचाव कर्मचारियों को भी हादसे की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं था. इससे पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गईं. संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक चेरनोबिल हादसे के चलते करीब 9000 लोग कैंसर से पीड़ित हैं. ग्रीनपीस संस्था का कहना है कि अन्य बीमारियों के चलते मृतकों की संख्या करीब दो लाख तक पहुँच सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें चेरनोबिल हादसा कैसे हुआ?26 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना चेरनोबिल में विकिरण बढ़ा 26 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||