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ऑस्ट्रेलिया चीन को यूरेनियम देगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत चीन अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम का आयात कर सकेगा. ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबेरा में प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के लिए दोनों देशों के बीच कई महीनों से वार्ता चल रही थी. दुनिया भर के यूरेनियम भंडार का 40 प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया में है. हालांकि ऑस्ट्रेलिया पहले चीन को यूरेनियम बेचने से इंकार करता रहा है. ऑस्ट्रेलिया का कहना था कि उसे चीन से इस बात के पर्याप्त आश्वासन नहीं मिल रहे थे कि चीन इस यूरेनियम का इस्तेमाल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए करेगा न कि सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए. एक ओर जहां ऑस्ट्रेलिया के पास यूरेनियम के भंडार हैं वहीं दूसरी ओर चीन की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा की ज़रुरतें आसमान छू रही हैं. अब तक चीन अपने कोयले के खदानों पर ऊर्जा के लिए निर्भर करता था लेकिन अब कोयले के भंडार ख़त्म हो रहे हैं और साथ ही तेल के भंडार भी चीन के पास पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं. चीन के बड़े शहरों में बिजली गुल होना आम बात हो गई है और यही कारण है कि चीन की सरकार कोशिश कर रही है कि ऊर्जा के दूसरे स्त्रोतों का रुख किया जाए. ज़ाहिर है कि सरकार परमाणु ऊर्जा का रुख कर रही है. अगले बीस वर्षों में चीन की योजना कम से कम बीस परमाणु रिएक्टर बनाने की है जिसके लिए उसे भारी मात्रा में यूरेनियम की आवश्यकता है. उल्लेखनीय है कि चीन की तरह की ऊर्जा ज़रुरतों वाले भारत को भी ऑस्ट्रेलिया ने यूरेनियम बेचने की पेशकश की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें रूस ने यूरेनियम सौदे को उचित ठहराया17 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस रूसी प्रधानमंत्री फ़्रैदकौफ़ भारत पहुँचे16 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत कोई नियम नहीं तोड़ रहा है'15 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान की परमाणु क्षमता बढ़ी10 फ़रवरी, 2003 | पहला पन्ना यूरेनियम के खनन पर विवाद | भारत और पड़ोस अटका पड़ा यूरेनियम का खनन | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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