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जनता की ईमानदारी, पुलिस की मुसीबत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान में जनता की ईमानदारी ने पुलिस का काम बढ़ा दिया है. पुलिस के पास इतनी भारी संख्या में खोए हुए सामान जमा कराए जाते हैं कि पुलिस उन्हें ज़्यादा दिन तक सहेज कर रखने की स्थिति में नहीं रह गई है. योमिउरि शिंबुन अख़बार के अनुसार वर्ष 2004 में जनता ने एक करोड़ सात लाख से भी ज़्यादा चीज़ें पुलिस के पास जमा कराई. यह संख्या पचास साल पहले की संख्या से साढ़े तीन गुना ज़्यादा है. जापानी जनता ने 2004 में जितने सामान पुलिस में जमा कराए, उनमें से 20 लाख से ज़्यादा छाते थे. जमा कराई गई चीज़ों को छह महीने तक सुरक्षित रखना पुलिस की ज़िम्मेदारी है. पुलिस ने ऐसा किया भी लेकिन इतनी भारी संख्या में जमा कराए गए सामान में से मात्र एक प्रतिशत को ही उनके मालिक ढूँढने आए. अब खोया हुआ छाता ढूँढने कितने लोग पुलिस के पास जाते हैं. लेकिन पुलिस जमा कराए गए छातों को छह महीने तक सुरक्षित रखने को बाध्य है. पुलिस का कहना है कि जापान में खोए हुए सामान के मामले में ईमानदारी दिखाने की परंपरा है. ऐसे में कम क़ीमत वाली चीज़ों को छह महीने तक जमा रखने की ज़रूररत नहीं है. पुलिस का कहना है कि छाते जैसी चीज़ों को इतनी लंबी अवधि तक सुरक्षित रखने की बाध्यता समाप्त की जानी चाहिए. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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