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कई अख़बारों ने विवादित कार्टून छापे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोप के कई देशों के अख़बारों ने पैगंबर मोहम्मद पर बने विवादित कार्टूनों को प्रकाशित कर डेनमार्क के समाचार पत्र युलांस पोस्टन के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है. अख़बार युलांस पोस्टन ने पिछले सितंबर में 12 कार्टूनों की सिरीज़ प्रकाशित की थी जिनमें से कई कार्टूनों में पैगंबर को इस्लामी चरमपंथी के रूप में प्रदर्शित किया गया था. अख़बार युलांस पोस्टन ने कार्टून से मुसलमानों की भावनाएँ आहत होने पर माफ़ी माँग ली है, लेकिन साथ ही कहा है कि उसे अभिव्यक्ति की आज़ादी है और वो जो चाहे प्रकाशित कर सकता है. कार्टूनों के प्रकाशन के बाद शुरू हुआ विवाद भड़कता ही जा रहा है. कई अरब राष्ट्रों ने डेनमार्क से औपचारिक विरोध दर्ज़ कराया है जबकि कई मुस्लिम देशों में डैनिश उत्पादों का बहिष्कार शुरू हो गया है. इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद को चित्रों या मूर्तियों में प्रदर्शित करने की मनाही है. अभिव्यक्ति की आज़ादी ताज़ा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया में रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स संगठन ने कहा है कि अरब जगत यह समझ पाने में नाकाम रहा है कि प्रेस की आज़ादी लोकतंत्र का एक अभिन्न अंग है. गुरूवार को फ़्रांसीसी अख़बार फ़्रांस स्वाग़, जर्मनी के डी वेल्ट, इटली के ला स्ताम्पा और स्पेन के एल पीरियोडिको ने विवादित कार्टून प्रकाशित किए. पैंगबर को बम के आकार की पगड़ी में दिखाते एक कार्टून को पहले पेज पर छापते हुए जर्मन अख़बार ने सवाल किया है कि क्या इस्लाम व्यंग्य का मुक़ाबला करने में सक्षम नहीं है. दूसरी ओर सभी 12 कार्टून छापते हुए फ़्रांसीसी अख़बार ने कहा है कि उसने यह दिखाने के लिए कार्टूनों को प्रकाशित किया है कि धर्मनिरपेक्ष समाज में धार्मिक आग्रहों की कोई जगह नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें पैगंबर मोहम्मद के 'कार्टून' पर आक्रोश30 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना घटती बिक्री से परेशान डैनिश कंपनी28 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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